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ओलावृष्टि के बाद तूफान से तबाही

Fri, 03 Apr 2015 11:32 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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मार्च में पकी फसल पर तीसरी बार बेमौसम बरसात की मार पड़ी है। गुरुवार देर रात आई आंधी और  बारिश ने गेहूं और तंबाकू की फसल को फिर तगड़ा नुकसान पहुंचाया। खेतों में कटी पड़ी तंबाकू को भीग कर लाल होने से बचाने के लिए किसान उसे मोमिया से ढक रहे हैं।
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दो-तीन दिन निकली धूप ने किसानों को कुछ राहत दी थी लेकिन बीती रात अचानक मौसम फिर बिगड़ गया। तेज आंधी के साथ ही जमकर बरसात हुई। इससे किसानों की रही सही फसल भी बर्बाद हो गई। गेहूं के गट्ठी खुल कर उड़ गए। गेहूं भीग गया। तंबाकू व आम के बौर को भी नुकसान हुआ। कादरी गेट इलाके में टीन शेड उड़कर बरगद के पेड़

पर अटक गया। कई जगह शहर में होर्डिंग भी टूटकर गिरीं। देहात में छप्पर भी उड़े।  शुक्रवार को  मौसम का मिजाज फिर से बिगड़ गया। आसमान में काले बादल छा गए।  अगर बरसात हो गई तो किसानों की रही सही फसल भी बर्बाद हो जाएगी। मौसम के करवट बदलने से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है। वहीं किसानों के माथे पर चिंता की
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लकीरे हैं। शाम को आसमान में छाए बादलाें ने किसानाें की धुकधुकी बढ़ा दी है।
एक महीने में तीसरी बार मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया। देर रात  बादल घिर आए और फिर तेज आंधी, बिजली की गड़गड़ाहट के साथ बारिश श़ुरू हो गई। जब तक हवा चलती रही और बिजली चमकती रही किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए ताकते रहे। लेकिन जैसे ही बारिश शुरू हुई किसानों के दिलों की घड़कनें तेजी से बढ़ने लगीं।

तहसील क्षेत्र के अधिकतर  किसान तंबाकू उत्पादक हैं। उनके परिवार का भरण पोषण, शादी विवाह और अन्य सारे काम तंबाकू की फसल से होने वाली कमाई से पूरे होते हैं। फसल के दाम अच्छे नहीं मिले तो  सारे सपने चकनाचूर हो जाते हैं। इस बार किसानों को अपने सपने टूटते नजर आ रहे हैं। हर हफ्ते हो रही बेमौसम बारिश से तंबाकू की फसल  धुल गई। पत्ताें का वजन कम हो चुका है। अब खेतों में कटी पड़ी तंबाकू पानी गिरने से लाल होने की कगार

पर पहुंच गई है। लाल होने पर तंबाकू के  वाजिब दाम नहीं मिलते हैं। देर रात हुई बारिश को देखकर कई किसानों ने खेतों में पड़ी तंबाकू को बचाने के लिए मोमिया और तिरपाल की व्यवस्था कर ली है।  किसानों ने बताया  वह  अभी तंबाकू को घर भी नहीं ले जा सकते हैं।  तंबाकू को खेत में सुखाना जरूरी है। नहीं तो ढेर लगने पर इससे निकलने वाली भस के कारण इसे पलटना मुश्किल हो जाएगा। कुदरत की मार से फसल को बचाने के लिए किसानों के परिवार

खेतों में तंबाकू की कटाई करने और उसे समेटने में जुटे हुए हैं। वहीं गेंहू की पकी फसल देर रात आई आंधी से खेतों में एक बार फिर लोट गई है। चमन लाल, राजेश और दीनदयाल आदि किसानों का कहना है अगले दो-तीन दिन में अगर आंधी के साथ बारिश आई तो गेहूं पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

कमालगंज प्रतिनिधि के अनुसार गांव रानूखेड़ा के रामआसरे कहते हैं कि करीब एक हफ्ते पहले गेहूं की फसल काटी थी। इस दौरान बरसात हुई और कटी फसल भीग गई। धूप निकलने पर फसल सुखाई तो आंधी में आधी से ज्यादा फसल उड़कर दूसरे के खेतों में चली गई। उन्होंने कहा कि आंधी और बरसात से करीब 60 प्रतिशत गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। अब तो साल भर खाने के लिए गल्ला ही हो जाए तो बहुत बड़ी बात है। रवि कुमार निवासी रानूखेड़ा का कहना

है कि उन्होंने मक्का की फसल की थी। आंधी से मक्का की फसल खेतों में पसर गई। इससे करीब 20 से 30 प्रतिशत फसल को नुकसान होने की आशंका है। बाग मालिक सतीशचंद्र दुबे निवासी सदरियापुर का कहना है कि आंधी से आम का बौर करीब 50 प्रतिशत झड़ गया है। बौर झड़ने से इस बार आम पर महंगाई रहेगी।
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