फर्रुखाबाद। यूपीआई से व्यापारियों को भुगतान करने पर 0.04 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाए जाने की चर्चा के बाद व्यापारी वर्ग में असमंजस है। फिलहाल इसका असर कारोबार पर दिखाई नहीं दे रहा है। अधिकांश व्यापारी यूपीआई से लेनदेन बंद करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि लोगों की सुविधा और व्यापारिक जरूरतों को देखते हुए कोई बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए। यदि शुल्क लागू होता है तो कारोबार प्रभावित होने के साथ नकदी के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है। एमडीआर लगाए जाने की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं होने से असमंजस बना हुआ है। 15 अक्तूबर के बाद स्थिति स्पष्ट होने पर व्यापारी आगे की रणनीति तय करने की बात कह रहे हैं।
फोटो-23 बृजेश गुप्ता
महंगाई और जीएसटी की दिक्कतों के बीच नया बोझ
लिंजीगंज के किराना व्यापारी बृजेश गुप्ता ने कहा कि व्यापारी पहले से महंगाई और जीएसटी की तकनीकी दिक्कतों से परेशान हैं। अब यूपीआई भुगतान पर 0.04 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाता है तो इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा। हालांकि अभी यूपीआई लेनदेन बंद करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
फोटो-24 गोपाल रस्तोगी
सोने-चांदी के महंगे होने से पहले ही मंदा कारोबार
सराफा व्यापारी गोपाल रस्तोगी ने बताया कि सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से पहले ही कारोबार में मंदी है। ऐसे में यूपीआई से लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी। इससे छोटे-बड़े सभी कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
फोटो-25 संजय गर्ग
नकदी की ओर लौट सकते हैं ग्राहक
शहर के प्रमुख वस्त्र कारोबारी संजय गर्ग ने कहा कि सरकार के इस निर्णय का व्यापार पर कहीं न कहीं असर पड़ेगा। यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क बढ़ता है तो लोगों का रुझान दोबारा नकदी की ओर बढ़ सकता है। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की कोशिशों पर भी असर पड़ सकता है।
फोटो-26 प्रांशु दुबे
पेट्रोल पंप पर बड़े यूपीआई भुगतान को लेकर चिंता
पेट्रोलियम कारोबारी प्रांशु दुबे ने बताया कि उनके कारोबार में 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर पांच रुपये शुल्क लगाए जाने की बात कही गई है। इससे तय सीमा से अधिक यूपीआई भुगतान लेने में परेशानी हो सकती है। आपात स्थिति में लोग पेट्रोल पंप से नकद धनराशि ले लेते थे, लेकिन शुल्क और नियम लागू होने पर यह सुविधा भी प्रभावित हो सकती है।