छावनी परिषद की बैठक में ठेकेदार के कार्यों की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय
कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह निर्णय मंगलवार को छावनी परिषद बोर्ड की
हुई बैठक में लिया गया। इसमें उपाध्यक्ष शशिमोहन की सदस्यता समाप्त करने
को उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
छावनी परिषद सभागार में
मंगलवार को बोर्ड की आकस्मिक बैठक हुई। इसमें रिश्वत के मामले में
उपाध्यक्ष शशि मोहन की गिरफ्तारी का मामला छाया रहा। बोर्ड के चेयरमैन
ब्रिगेडियर कबिंद्र सिंह ने मामले की जांच को बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव
रखा। इसके तहत ठेकेदार के कार्यों की जांच को कमेटी का गठन किया गया। इसमें
एमईएस के दुर्ग अभियंता मेजर सुरेश एन,
टेक्निकल इंजीनियर एचएस अरोड़ा और
नगर क्षेत्र के अधिशाषी अभियंता विद्युत सुरेश कुमार को शामिल किया गया।
इनके सहयोग में छावनी क्षेत्र के अवर अभियंता स्वतंत्र सिंह सेंगर को लगाया
गया है। छावनी परिषद के सईईओ एमपीआर त्रिपाठी ने बताया कि यह कमेटी 10 से
12 दिनों में ठेकेदार के किए गए कार्यों की गुणवत्ता परखेगी। कमेटी बचे हुए
कार्य का आंकलन कर स्टीमेट भी बनाएगी। उन्होंने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट
के आधार पर ठेकेदार के बकाया भुगतान के बारे
निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने
बताया कि बोर्ड की सहमति से प्रधान निदेशक रक्षा संपदा को पत्र लिखकर
रिश्वत लेने में पकड़े गए बोर्ड उपाध्यक्ष शशिमोहन की सदस्यता समाप्त करने
की सिफारिश के लिए पत्र भेजा जाएगा। अधिशासी अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार
दिलीप कठेरिया को कैंट क्षेत्र में मरम्मत कार्य करने के लिए 48 लाख रुपये
का टेंडर 01 अक्तूबर 2014 को दिया गया था। 28 फरवरी को कार्य समाप्त करने
की अंतिम तिथि थी। ठेकेदार को कार्य समाप्त करने के लिए
दो बार समय बढ़ाया
गया था। इसके बावजूद कार्य पूरा न होने पर 28 मार्च को नोटिस देकर 31 मार्च
तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। कार्य पूरा न होने की दशा में
फाइनल पेमेंट का 20 प्रतिशत भुगतान और जमानत धनराशि की रकम को रोके जाने का
आदेश दिया था। उन्होंने बताया कि ठेकेदार को कार्य के दौरान ही तीन बार
भुगतान किया
जा चुका है। इस मामले में किसी और सभासद की संलिप्तता से इंकार
किया। बैठक में कर्नल डीपी प्रशांता, कर्नल अयूब अहमद एन, कर्नल एसएस
विष्ट, तेजर सुरेश एन, सिटी मजिस्ट्रेट पीके जैन, सभासद अवंती, शमा अनवर
जमाल, अजय कुमार, विजय कुमार व वीरपाल मौजूद रहे।