फर्रुखाबाद। डाक्टरों की कमी के चलते चिकित्सा व्यवस्था को लकवा मार गया है। डा. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। वहीं, सीएमओ के अधीन चल रहे प्राथमिक व न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तकरीबन एक सौ डाक्टरों की कमी चल रही है। अधिकतर न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्टों के सहारे चल रहे हैं। इससे चिकित्सा व्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतर गई है।
लोहिया अस्पताल में 12 डाक्टर कार्यरत हैं। इनमें डा. जीपी सचान दो महीने से अवकाश पर चल रहे हैं। लोहिया अस्पताल में दूरदराज से मरीज तो आते हैं लेकिन डाक्टरों के अभाव में निराश हो लौट जाते हैं।
अस्पताल में चेस्ट विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट का एक-एक पद रिक्त है। पैथालॉजिस्ट के दोनों पदों पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है। स्किन, हृदय रोग विशेषज्ञ के दो-दो पद सृजित हैं लेकिन एक भी डाक्टर यहां मौजूद नहीं है। एनाथेटिक्स में दो पदों में से केवल एक डाक्टर की तैनाती है। अस्थि रोग विशेषज्ञ और ईएनटी के सभी पद खाली चल रहे हैं। आपातकालीन में दो पद रिक्त हैं। कुल मिलाकर यहां 29 डाक्टरों के पद सृजित हैं, जिसमें से 12 डाक्टरों की तैनाती है।
रोगी राम नरेश, भोला सिंह और शिवकुमार का कहना है कि डाक्टरों के न मिलने से उन्हें न परामर्श मिल सका और न दवा मिली। लोहिया अस्पताल इस समय ऊंची दुकान फीका पकवान वाली कहावत चरितार्थ कर रहा है।
लोहिया अस्पताल में डाक्टरों की कमी के चलते रोगियों को परेशानी हो रही है, लेकिन डाक्टरों की मांग लगातार की जा रही है। आठ दिन पहले डायरेक्टर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के साथ हुई बैठक में डाक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया था। अतिशीघ्र डाक्टरों की कमी दूर कर दी जाएगी। - डा.बी.बी.पुष्कर, मुख्य चिकित्साधीक्षक
127 डाक्टरों के सापेक्ष 30 तैनात है। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ताजपुर, न्यामतपुर सहित सात अस्पतालों में डाक्टर नहीं हैं। इन तीस डाक्टरों में डिप्टी सीएमओ और सीएमओ भी शामिल हैं। इनमें से आठ डाक्टरों के तबादले गैर जनपद कर दिए गए हैं। डीएम ने ट्रांसफर चल रहे इन आठ डाक्टरों को रिलीव नहीं किया है। - डा. राकेश कुमार, सीएमओ