फर्रुखाबाद। जिले में मनरेगा का हाल बेहाल है। लंबे अरसे से 373 ग्राम
पंचायताें में काम बंद चल रहा है। इन दिनाें सर्दी के मौसम में गांव में
काम न मिलने से जॉबकार्ड धारक परेशान हैं। महिलाआें की भागीदारी 9 फीसदी से
ऊपर नहीं बढ़ रही है।
जिले को इस सत्र में लेबर बजट के लिए 22 करोड़ रुपया
मिला था। इसमें से 10 करोड़ 11 लाख रुपया ही अब तक खर्च हो पाया है। इसकी
वजह अधिकारियाें की लापरवाही है। मनरेगा की जिम्मेदारी अब तक उपायुक्त
जनार्दन यादव के पास थी। वह लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। अब यह चार्ज
ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक डा. डीआर विश्वकर्मा के पास है।
जिले
में 512 ग्राम पंचायतें हैं। इनके पास मनरेगा के लिए मोटा बजट भी है। इसके
बाद भी काम बंद पड़े हैं। ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व
रोजगार सेवक दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इससे ग्राम पंचायतों में रहने वाले
जॉबकार्ड धारकाें को काम नहीं मिल पा रहा है।
सर्दी के मौसम में इनके लिए
परिवार चलाने का संकट पैदा हो गया है। परियोजना निदेशक डा. डीआर विश्वकर्मा
ने बताया कि सभी गांव पंचायताें में काम शुरू कराने की कार्रवाई की जा रही
है। एपीओ पर शिकंजा कसा जा रहा है। खंड विकास अधिकारियाें को भी हिदायत दी
गई है।
विकासखंड ग्राम सभाएं बंद काम
बढ़पुर 40 26
कायमगंज 76 46
कमालगंज 98 67
मोहम्मदाबाद 82 73
नवाबगंज 57 38
राजेपुर 72 59
शमसाबाद 78 64
सघन सहभागी नियोजन अभ्यास कार्यक्रम चलेगा
चार
विकास खंडाें में मनरेगा के काम की हालत ठीक नहीं है। यहां अब सघन सहभागी
नियोजन अभ्यास कार्यक्रम चलेगा। इसके लिए कायमगंज, शमसाबाद, राजेपुर व
नवाबगंज विकास खंडाें को चुना गया है। इसके लिए खंड विकास अधिकारियाें को
प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
यहां मनरेगा के लिए कैलेंडर बनेगा। इसी के
तहत काम कराए जाएंगे।
महिलाआें क ी भागीदारी 9 प्रतिशत
मनरेगा में
महिलाआें की भागीदारी 33 फीसदी होनी चाहिए। इसके सापेक्ष जिले में
महिलाआें की भागीदारी 9 फीसदी ही है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ नहीं रही है।
अब इंदिरा आवासाें के निर्माण में महिलाआें को काम देकर इनकी भागीदारी
बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।