रविकांत के खेत में तैयार हो रही केला की फसल। संवाद न्यूज एजेंसी
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खेती में तकनीक की मदद ली जाए तो किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसका जीता जागता उदाहरण कायमगंज के गांव भटासा निवासी रविकांत गंगवार हैं। वह केला व पपीता की खेती के साथ गेंदा की सहफसल लेकर समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। मिर्च की खेती में भी अच्छी कमाई की। तकनीक की मदद से खेती कर खुद मजबूत होने के साथ वह अन्नदाताओं को भी तरक्की की राह दिखा रहे हैं।
मौसम कोई भी हो अन्नदाता अनवरत कार्य कर खुद की रोटी कमाने के साथ समाज की भी भूख मिटाने का इंतजाम करता है। हाड़तोड़ मेहनत करने वाले छोटे किसान को तरक्की करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन थोड़ी भूमि वाले यदि खेती में तकनीक की मदद लें तो उन्हें थोड़ी सी मेहनत अच्छी कमाई करा सकती है।
कायमगंज क्षेत्र के गांव भटासा निवासी रविकांत गंगवार के पास तीन एकड़ भूमि है। उन्होंने 10 साल से खेती में तकनीक की मदद ली तो तरक्की की राह भी आसान हो गई। आलू की फसल के लिए ख्याति प्राप्त जनपद फर्रुखाबाद में वह केला व पपीता की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। रविकांत का कहना है कि केला और पपीता के साथ गेंदा की सहफसल लेकर लागत निकाल लेते हैं। पौधों के बीच में पड़ी खाली भूमि में वह मिर्च की भी खेती करते हैं।
अक्तूबर में मिर्च के पौधों की रोपाई होने के बाद जुलाई तक फसल चलती है। इस बार करीब 40 क्विंटल प्रति एकड़ मिर्च निकली। इसमें तोरई की भी फसल ले लेते हैं। इससे साल में चार फसलों का लाभ मिल जाता है।
रविकांत ने बताया कि वह केला के पौधे बंगलूरू से मंगाते हैं, जबकि पपीता के पौधे खुद तैयार करने के साथ स्थानीय नर्सरी से भी खरीदते हैं। एक एकड़ केले व पपीते की खेती में पांच लाख तक मुनाफा मिल जाता है।
फसल तैैयार होने पर वह जनपद एटा, सीतापुर व सिकंदरामऊ में बिक्री करते हैं। उन्हें देखकर अन्य किसान भी केला व पपीता की खेती की ओर प्रभावित होते हैं। उन किसानों को वह खेती का तरीका भी बताते हैं।
कृषि उपनिदेशक राजकुमार ने बताया कि कृषि विभाग से वह टेक्निकल गाइड लाइन व बीज उपलब्ध कराते रहते हैं। वह केला व पपीता की खेती का निरीक्षण भी करने गए थे। बताए हुए तरीकों पर फसल की उपज भी अच्छी होती है।