माघी पूर्णिमा उमड़ा आस्था का सैलाब, गंगा में डुबकी लगा कमाया पुण्य
फर्रुखाबाद। पांचाल घाट पर एक माह से बसे मेला रामनगरिया में शनिवार को माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ा। बड़ी संख्या में लोगों ने भागीरथी में पुण्य की डुबकी लगाई। गंगा तट पर भक्तजन सत्यनारायण कथा, यज्ञ व भंडारों का आयोजन करते रहेे। बच्चों के मुंडन संस्कार कराए और जोत बजवा कर पुण्य फल अर्जित किया। देर शाम तक गंगा स्नान का दौर चलता रहा।
रामनगरिया में कई जिलों के श्रद्धालु पवित्र माह माघ में कल्पवास कर रहे थे। शनिवार को माघ पूर्णिमा पर कल्पवासियों के परिजन, रिश्तेदार एवं साधु-संतों के अलावा श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। गंगा में स्नान किया और मेला, झूलों का लुत्फ उठाया। गंगा के तट पर सत्यनारायण कथा कराकर कन्या भोज किया। साधु-संतों के क्षेत्रों में भी बेशुमार भीड़ रही।
लोगों ने संतों से आशीर्वाद लिया। जगह-जगह यज्ञ और भंडारे होते रहे। साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भंडारों में प्रसाद ग्रहण किया। बच्चा स्वामी के क्षेत्र में स्वामी शिव स्वरूप बच्चा बाबा ने शनिवार को पूर्ण आहुति करके शतचंडी महायज्ञ का समापन किया। भक्तों ने भी यज्ञ में आहुति डाली।
गंगा मैया से घर जाने की ली विदाई
भागीरथी के तट पर एक माह से कल्पवास करने वाले भक्तों ने गंगा स्नान, दान और संत दर्शन के बाद विदाई लेनी शुरू कर दी। अपनी राउटी उखाड़ कर वाहनों में भरकर ले जाने लगे हैं। वैष्णव संप्रदाय के अध्यक्ष बाबा बालक दास महाराज, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अध्यक्ष सत्यगिरी महाराज, आदर्श क्षेत्र के ब्रह्मचारी स्वामी सत्यस्वरूप महाराज, स्वामी शिव स्वरूप बच्चा बाबा आदि कई संत कहते हैं कि उनके क्षेत्र के भक्त रविवार को मां गंगा मइया से आशीर्वाद लेकर सकुशल घर जाने के लिए विदाई लेंगे।
धूमधाम से हुई ठाकुरजी की विदाई
बरगदिया घाट के महंत बाबा विष्णुदास महाराज ने गंगा के तट पर मंदिर बनाकर ठाकुरजी को विराजमान किया था। माघ पूर्णिमा के दिन शनिवार को धूमधाम से ठाकुरजी को पालकी में बैठाकर मेला क्षेत्र से विदाई दी गई। विदाई के समय महिला-पुरुष और साधु-संतों ने ठाकुरजी पर फूलों की वर्षा की। सभी ने अगली साल फिर धूमधाम से आने की प्रार्थना की। अब ठाकुरजी का अगला बसेरा बरगदिया घाट स्थित मंदिर में होगा।
गंगा के तट पर फैली गंदगी
गंगा तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने शुक्रवार शाम को पहुंच कर डेरा जमा दिया। ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा मइया के जयकारे लगाते हुए पहुंचे आस्थावानों ने स्नान शुरू कर दिया। पुण्य कमाने की मंशा से स्नान किया और माता की गोद में गंदगी के ढेर छोड़ कर चले गए। गंदगी हटाने के लिए एक भी सफाई कर्मी नजर नहीं आया।
शोपीस बने वॉच टावर
मेले में बाजार क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वॉच टावर बनाए गए थे। इन पर खड़े होकर पुलिस कर्मियों को निगरानी करनी थी, लेकिन पूर्णिमा के दिन बेशुमार भीड़ के बावजूद टावर सूने पड़े रहे। तमाम लोग गंगा में डुबकी लगाकर बाहर निकले, तो किसी की पैंट गायब थी तो किसी की शर्ट। परेशान लोग इधर-उधर भटकते रहे। संतों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही रही। जब वॉच टावरों पर किसी की ड्यूटी नहीं लगाई गई तो बनाना ही बेकार रहा।
तीन किमी पैदल चलकर मिले गंगा के दर्शन
पुलिस-प्रशासन ने जाम से निजात दिलाने के लिए पांचाल घाट से तीन किमी दूर ही वाहनों को रोक दिया था। कार, ट्रैक्टर-ट्राली, बसें, टेंपो, टैक्सी आदि को कादरीगेट, मसेनी, चाचूपुर मोड़ पर ही रोक दिया था। दूरदराज से आए बुजुर्ग, बच्चों को तीन-तीन किमी पैदल चलकर गंगा स्नान करना पड़ा।
भारतीय मित्र परिवार ने खिलाई तहरी
पांचाल घाट स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम पर भारतीय मित्र परिवार ने तहरी वितरित की। प्रदेेश कार्यकारिणी सदस्य राकेश तिवारी ने कहा कि दूरदराज से आने वाले गंगा भक्तों को तहरी खिलाने से पुण्य फल मिलता है। इसमें सुनील मिश्रा, अजय बाजपेई, प्रमोद दीक्षित, प्रमेंदु सक्सेना आदि तमाम लोगों का सहयोग रहा।