फर्रुखाबाद। माफिया अनुपम दुबे ने साथियों के साथ 26 जुलाई 1995 को फतेहगढ़ कोतवाली से करीब 600 मीटर दूर बजरिया अलीगंज मोहल्ले में गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी। हत्या के मामले में मृतक ठेकेदार शमीम के भाई नसीम ने अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट में गवाह इदरीश और गांव के सरफराज को चश्मदीद गवाह बनाया था। इदरीस पढ़ा लिखा नहीं है। इसके बावजूद वह पूरे समय तक अपने बयानों पर कायम रहा। इदरीस को कई बाद जान माल की धमकियां दी गई। इदरीस ने अपने बयान में कहा था कि अनुपम दुबे ने डबल बैरल बंदूक से गोली चलाकर शमीम की हत्या की है। अडिग रहे इदरीस के बयान और वादी मुकदमा नसीम की पैरवी से ही माफिया अनुपम दुबे को दूसरी आजीवन सजा मिली। उसके ममेरे भाई शिशु उर्फ बालकिशन को भी आजीवन सजा मिली।
पिता की मौत का बदला लेने के लिए अनुपम ने की दो हत्याएं
- दोनों ही मामलों में माफिया को हुई आजीवन कारावास की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। पिता महेश दुबे की मौत का बदला लेने के लिए माफिया अनुपम दुबे ने दो हत्याएं की। दोनों ही मामलों में माफिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
एक मई 1995 को अनुपम दुबे अपने पिता महेश चंद्र दुबे के साथ जीप से कानपुर की ओर जा रहा था। कस्बा समधन में जीप से शबाना बेगम और रुकशाद नाम की दो महिलाएं जीप की टक्कर लगने से घायल हो गई थीं। जीप से दुर्घटना होने पर भीड़ बढ़ने लगी। महेश दुबे और अनुपम दुबे ने इस दौरान भागने की कोशिश की। भीड़ को आता देख महेश दुबे ने अपनी बंदूक से गांव वालों पर फायर कर दिए थे। इससे उत्तेजित हुए गांव वालों ने महेश दुबे और अनुपम दुबे को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इससे महेश दुबे की मौत हो गई थी।
अनुपम दुबे को भी गांव वालों ने मरणासन्न छोड़ा था। इसका बदला लेने के लिए अनुपम दुबे ने चाचा लक्ष्मीनारायन, कौशल किशोर, ममेरे भाई शिशु उर्फ बालकिशन और साथी राजू लंगड़ा के साथ मिलकर दिनदहाड़े गोलियां चलाकर पीडब्ल्यूडी ठेकेदार शमीम की 26 जुलाई 1995 को हत्या कर दी गई थी। अनुपम की बदला लेने की मंशा यहीं शांत नहीं हुई उसने घटना के दौरान तैनात इंस्पेक्टर रामनिवास को भी 14 मई 1996 को भी ट्रेन में कानपुर जाते समय गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया था।
इंस्पेक्टर रामनिवास एक अन्य मामले में गवाही देकर ट्रेन से वापस लौट रहे थे। इस मामले में कानपुर कोर्ट ने दिसंबर 2023 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। शमीम की हत्या के मामले में भी ईसी एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश तरुन कुमार सिंह ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
-
माफिया ने पिता की हत्या के दो माह के अंदर ले लिया बदला
पिता की हत्या का बदला लेने का ऐसा जुनून माफिया के सिर पर चढ़ा कि उसने पिता की हत्या के दो माह के अंदर ही ठेकेदार शमीम को गोलियाें से भूनकर हत्या कर दी थी। दिनदहाड़े गोलियां चलने से बाजार में भगदड़ मच गई। दुकानदार अपनी दुकानें खुली छोड़कर भाग गए थे।
-
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चार गोली लगने की हुई थी पुष्टि
डॉ. सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने शमीम के शव का पोस्टमार्टम किया था। पोस्टमार्टम में शमीम के शरीर से चार गोलियां मिली थीं। रिपोर्ट के अनुसार गोली लगने से गले, रीढ़ की हड्डियां व पसलियां टूट गई थीं। चेहरा, सिर भी बुरी तरह बिखर गया था।