कमालगंज। प्रभु राम का सिंहासन सोमवार को मुख्य मार्ग पर बैंडबाजे के साथ निकला। सिंहासन पर बैठे श्रीराम सहित चारों भाइयों की छवि को लोग निहार रहे थे। रामलीला मैदान में रथ पहुंचने पर विश्वामित्र आगमन व ताड़का वध लीला खेली गई। यज्ञ विध्वंस करने वाली ताड़का राक्षसी का श्रीराम ने वध किया।
लीला प्रसंग में महर्षि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने यज्ञ की रक्षा के लिए राम-लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने का आग्रह राजा दशरथ से किया। महाराज दशरथ ने काफी सोच विचार कर अंत में राम व लक्ष्मण को विदा किया। महर्षि के साथ जब दोनों भाई जंगल में जा रहे थे, तभी ताड़का राक्षसी यज्ञ विध्वंस करती है। सुकुमार बालकों पर क्रोधित ताड़का झपट पड़ी।
भगवान श्रीराम ने एक बाण से ही उसका वध कर दिया। लक्ष्मीकांत व राजकिशोर मिश्रा ने लीला निर्देशन किया। रामलीला सेवक रवि कुमार कुशवाहा, दिव्यांशु हलवाई, अवधेश मलैया, रामजी आदि व्यवस्था में रहे।(संवाद)