फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल में 24 घंटे बिजली देने के लिए नौ साल पहले स्थापित 33 केवी का उपकेंद्र चंद महीने भी काम न आया। तकनीकी खामियों के चलते इसका न तो मरीजों को फायदा मिला और न ही डॉक्टर और अन्य स्टाफ को। मरम्मत के नाम पर दो-तीन लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। फिर भी चालू नहीं हो सका। अब गर्मियों में बिजली की कटौती में जनरेटर न चलने से मरीज बेडों पर गर्मी से तड़प रहे हैं।
मरीजों की सुविधा के लिए लगी मशीनों और अन्य उपकरण चलाने में निर्बाध रूप से बिजली देने के लिए जनवरी 2017 में उपकेंद्र का शुभारंभ हुआ था। यह उपकेंद्र चंद दिन चलने के बाद बंद हो गया था। लकूला उपकेंद्र से आने वाली बिजली 24 घंटे में 10 बार ट्रिप लेती है। कई बार काफी देर तक चली जाने से मरीज गर्मी में तड़पते रहते हैं। जनरेटर न चलने से दिन में सीटी स्केन, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे भी नहीं हो पाते, लिहाजा मरीजों घंटों इंतजार करना पड़ता है।
एक ट्रांसफार्मर में 925 लीटर डीजल होता खर्च
उपकेंद्र में एक-एक एमवीए के दो ट्रांसफार्मर लगे हैं। एक ट्रांसफार्मर में 925 लीटर तेल डाला जाता है। वहीं ईंधन के लिए मात्र 35 हजार रुपये मिलते हैं। दोनों ट्रांसफार्मरों में तेल की कीमत करीब पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। वहीं उपकेंद्र का फाटक 24 घंटे खुला रहता है। रोजाना इसी में अस्पताल का कूड़े का ढेर उपकेंद्र में लगा दिया जाता है। उपकेंद्र के खुला रहने से ट्रांसफार्मरों से कीमती तेल और अन्य सामान चोरी होता रहता है।
एक माह में चालू होगा उपकेंद्र: सीएमएस
सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि उपकेंद्र को चालू कराना प्राथमिकताओं में शामिल है। बिजली विभाग ने उसकी करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) को खराब बताया है। उपकेंद्र अधिक नीचा होने की वजह से सीलन आती है। उसका प्लेटफॉर्म चार-पांच फीट ऊंचा उठाया जाएगा। यह काम एक महीने में पूरा कराने पर काम कर रहे हैं।