फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल को 24 घंटे बिजली दिए जाने की प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली योजना को विभागीय अफसरों की अनेदखी का डंक लग गया है। छह महीने पहले अलग फीडर बनने के बावजूद अस्पताल को 24 घंटे बिजली मिलना नसीब नहीं हुई है। फीडर से बिजली सप्लाई शुरू करते ही कभी केबिल फुंक जाती तो कभी अस्पताल की वायरिंग जल जाती है। इस कारण अलग फीडर सफेद हाथी साबित हो रहा है।
तहसील, लोहिया अस्पताल और दीवानी न्यायालय को 24 घंटे बिजली देना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली योजना में शामिल है। इसके तहत डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल मेें अलग फीडर का निर्माण कराया गया। बेवर रोड स्थित ट्रांसमिशन से सेपरेट फीडर तक 33 हजार की लाइन खींची गई। यह सब काम फरवरी 2016 में बिजली विभाग ने पूरा कर दिया। मई मेें लोहिया अस्पताल को सेपरेट फीडर से बिजली सप्लाई दी गई तो अस्पताल की वायरिंग में फाल्ट आ गया और फीडर से सप्लाई बंद हो गई।
इस कारण पुराने ढर्रे से अस्पताल को बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई। जो कमी फीडर में आई उसको ठीक कराने के बाद जुलाई में सप्लाई शुरू की गई तो अस्पताल की वायरिंग फिर जल गई। इस कारण दोबारा से 24 घंटे बिजली सप्लाई दी जाने की योजना विफल हो गई। अस्पताल परिसर की वायरिंग को ठीक कराया गया और फीडर में जो कमी थी वह भी ठीक कराई गई। अगस्त में लोहिया अस्पताल को 24 घंटे बिजली दिए जाने के लिए सेपरेट फीडर फिर से चालू किया गया।
सुबह फीडर चालू हुआ और शाम को 1100 एमएम की केबल का कुछ हिस्सा जल गया लेकिन वहां 190 एमएम की पतली केबल नहीं जली। इसको लेकर बिजली विभाग के अधिकारी असमंजस में पड़ गए। मोटी केबल जलने और पतली केबिल न जलने के कारण सवाल उठने शुरू हो गए। इस कारण केबल बदलने का काम अभी तक नहीं किया गया। जिससे लोहिया अस्पताल को 24 घंटे बिजली दिए जाने की योजना तस की तस पड़ी है।