फर्रुखाबाद। बिना ड्यूटी के सिपाही का साढ़े तीन वर्ष तक वेतन निकलने के मामले में गलत तरीके से उसका प्रमोशन का फार्म भरने के मुकदमे में आरोपी तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी पर एडीजी पीएसी मुख्यालय ने अनुमति नहीं दी है। जांच पर प्रश्न चिन्ह लगाकर पत्रावली विधिक राय के लिए अभियोजन अधिकारी के पास भेज दी है।
पुलिस लाइन से वर्ष 2016 में तबादले पर थाना जहानगंज भेजे गए सिपाही नरेश यादव ने वहां आमद नहीं कराई थी। इसके बाद 14 दिसंबर को उसकी मौत की जानकारी जनपद कानपुर नगर के थाना शिवराजपुर के गांव कपूरपुर निवासी पत्नी सीमा यादव ने आरआई किश्वर अली को दी थी। तब विभाग को पता चला कि साढ़े तीन वर्ष तक बिना ड्यूटी के सिपाही नरेश का वेतन निकलता रहा। एसपी के आदेश पर तत्कालीन एएसपी त्रिभुवन सिंह ने जांच की और कैश पटल के दरोगा अशोक शुक्ला, मुंशी शाहिद, गणना कार्यालय के दीवान कोमल सिंह को एसपी ने निलंबित कर दिया था। सिपाही नरेश की चरित्र पंजिका में गलत तरीके से इंट्री व उसके बिना आए प्रमोशन फार्म भरने के मामले में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र (वर्तमान में पीएसी मुख्यालय लखनऊ महानगर में वरिष्ठ लिपिक) के खिलाफ धोखाधड़ी कर सिपाही को लाभ पहुंचाने के मामले में फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचक दरोगा दिनेश यादव ने आरोपी वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत के खिलाफ साक्ष्य संकलित कर चार्जशीट लगाकर पीएसी मुख्यालय महानगर लखनऊ के एडीजी से अनुमति मांगी थी। एडीजी पीएसी वीके सिंह ने गिरफ्तारी की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जांच पर कई प्रश्न चिन्ह लगाकर विधिक राय के लिए पत्रावली अभियोजन अधिकारी के पास भेज दी है। दरोगा दिनेश यादव ने बताया कि एडीजी ने गिरफ्तारी की अनुमति नहीं दी है।