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कंपिल कताई मिल की 45 एकड़ भूमि बेचकर निपटाई जाएगी देनदारी

Sat, 13 Feb 2016 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। 15 साल से बंद पड़ी कंपिल कताई मिल की देनदारी अतिरिक्त पड़ी 45 एकड़ भूमि बेचकर निपटाई जाएगी। इस मिल पर मजदूरों और अन्य मदों का 80 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। सरप्लस भूमि को बेचने के लिए शासन स्तर से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
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वर्ष 1984 में कंपिल कताई मिल का शुभारंभ सहकारिता विभाग की ओर से तत्कालीन सांसद खुर्शीद आलम खां ने कराया था। अधिकारियों की लूट-खसोट के चलते मिल की हालत खराब होती गई। इससे 1500 अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन भी मिल अदा नहीं कर सकी। वर्ष 2000 तक मिल 80 करोड़ के कर्ज में डूब गई तो इस इसे बंद कर दिया गया।

नतीजतन 1500 अधिकारी और कर्मचारी बेरोजगार हो गए। शासन ने इस मिल को चालू करने का निर्णय लिया। मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा जारी शासनादेश पर 29 जनवरी 2016 को निदेशक उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल संघ लिमिटेड कानपुर की अध्यक्षता में मंडलायुक्त के शिविर कार्यालय कानपुर में बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सरप्लस भूमि को बेचने का निर्णय लिया गया।
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बैठक में फर्रुखाबाद के कोषाधिकारी श्रीनिवास शुक्ल को भी भाग लेने के लिए बुलाया गया। कोषाधिकारी ने कंपिल कताई मिल की 45 एकड़ भूमि को सरप्लस बताया और 85 एकड़ भूमि कताई मिल से संबंधित की जानकारी दी। मिल की पड़ी सरप्लस भूमि को सरकारी प्रयोग में लाया जाए या किसी कारपोरेशन या प्राइवेट सेक्टर को बेच दी जाए, पर विचार-विमर्श किया गया।

वर्जन
1500 श्रमिकों के बकाया वेतन तथा अन्य देनदारी सरप्लस भूमि को बेचकर निपटाई जाएगी। देनदारी निपटने के बाद सरकार मिल को चालू कराने पर भी विचार करेगी। मिल चालू होने का निर्णय अन्य बैठकों में लिया जाएगा। वैसे 11 मिलों में से इटावा कताई मिल आवास विकास को बेच दिया गया है। सीतापुर कताई मिल की मशीनें भी बेच दी गई हैं। कंपिल कताई मिल की अतिरिक्त भूमि को बेचने पर सहमति हो गई है। - श्रीनिवास शुक्ल, कोषाधिकारी 
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