गन्ना किसानों की मेहनत पर चीनी मिल का डाका रुक नहीं रहा है। सोमवार को
अमर उजाला में खबर छपने के बाद अधिकारियों के इशारे पर अब पर्ची पर कटौती
लिखना तो बंद कर दिया गया है। पर किसान बताते हैं कि कटौती जारी है। कांटे
पर कटौती कर रजिस्टर में कटौती का गन्ना दर्ज किया जा रहा है। घटतौली किए
जाने से भी किसानों में रोष है।
सोमवार को अमर उजाला ने केन सुपरवाइजर
के पर्ची पर दो क्विंटल कटौती किए जाने की लिखी बात को प्रमुखता से
प्रकाशित किया था। इसके बाद अब यह काम चोरी छिपे किया जा रहा है। मिल
यार्ड में खड़े गन्ना किसानों ने बताया कि अब पर्ची पर कटौती नहीं लिखी जा
रही है। कांटे पर ट्राली तुलने पर ही उसमें कटौती का गन्ना काटकर रजिस्टर
पर दर्ज किया जाता है।
बताया कि किसानों को 4-4 दिन तक यार्ड में खड़े रखा
जाता है। इसके बाद गन्ने को सूखा या अनुपयुक्त प्रजाति का बताकर कटौती का
दबाव डाला जाता है। मजबूर होकर किसान ट्रैक्टर के भाड़े और चार दिन की भूख
प्यास से बचने के लिए कटौती कटाते हैं। बताया कि कांटों पर घटतौली भी की
जा रही है। किसान आरोप लगाते हैं कि इस गन्ने से चीनी बनाकर अधिकारी उसे
बैक डोर से बाजार में बेचते हैं। इसका कहीं लेखा जोखा नहीं रखा जाता। उनका
कहना है कि वह जानकर भी आवाज नहीं उठा सकते।
इस संबंध में मिल के
महाप्रबंधक डीके सक्सेना से जानकारी करने का प्रयास किया तो उन्होंने बात
करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि वह बहुत व्यस्त हैं अभी बात नहीं
कर सकते। उन्हें जब किसानों के आरोपों की जानकारी दी तो कह दिया कि आरोप
निराधार हैं। न तो किसी प्रकार की कटौती की जा रही है और न ही कांटों पर
घटतौली ही हो रही है।
पुआल पर रातें बिता रहे हैं किसान
चीनी मिल गन्ना किसानों को 4-4 दिन मिल यार्ड में भूखे प्यासे रहने को
मजबूर कर रही है। मिल यार्ड में तीन दिन से साथ लाई पुआल पर सो रहे किसानों
ने अपना दर्द बयान किया है । यार्ड में तीन दिनों से अपनी बारी की
प्रतीक्षा में 15 किलोमीटर दूर गढ़िया जगन्नाथ से आए किसान सुधीर, मुनेश,
स्वदेश, रिंकू, विजेंद्र, शीलू सिंह, राकेश, भोगपुर निवासी सुग्रीव,
कलुआपुर निवासी निर्दोष कुमार ने बताया कि उन्हें 8 फरवरी को टोकन जारी
किया गया था।
तबसे वह मिल यार्ड में अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उन्हें नजरअंदाज कर मिल सेंटरों से आने वाले ट्रकों और
ट्रैक्टरों को पहले खाली किया जाता है। एक ट्राली किसान की और तीन सेंटर
की तौले जाने का प्रावधान है। रोज खराबी के कारण 3-4 घंटे मिल बंद भी रहती
है। बताया कि इस बीच उन पर ट्रैक्टर भाड़े का बोझ तो चढ़ता ही है। भूखा भी
रहना पड़ता है।
साथ ही रात हो या दिन मिल यार्ड की धूल में पुआल बिछाकर
रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इन तीन दिनों में उनके गन्ने को सूखा और
खराब बताकर कटौती का दबाव डाला जाता है। बताया कि अब पर्ची पर लिखकर कटौती
नहीं की जा रही है। लेकिन कांटे पर कटौती कर रजिस्टर में दर्ज की जा रही
है।