श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के चौथे दिन मंगलवार को संत जगन्नाथ गुरु ने
कहा कि नारायण को श्रद्धा-भक्ति से प्राप्त किया जा सकता है। नारायण से जब
संबंध जुड़ जाएगा तो लक्ष्मी स्वत: भक्त के घर दौड़ी चली आएंगी। श्री
सूर्यनारायण धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री नारायण मंदिर में चल
रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में कथा कहते हुए कानपुर से आए जगन्नाथ
गुरु ने
कहा कि लक्ष्मी हमेशा विष्णु भगवान के साथ ही रहती हैं। बिना
नारायण के घर आई लक्ष्मी ज्यादा दिन टिकती नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति
के ज्ञान और वैराग्य दो पुत्र हुए। वृंदावन में भक्ति जवान हो गई और इनके
दोनों पुत्र बूढ़े हो गए। उन्होंने कहा कि संत की संगत से ही जीव का भला
हो सकता है। प्रभु कृपा से सत्संग की ओर मनुष्य को जाना चाहिए। इससे पहले
आचार्य योगेश भारद्वाज, जयकिशोर कौशिक, कृष्ण मुरारी, जगदीश वाजपेयी और
आकाश शुक्ल ने महायज्ञ संपन्न
करवाया। मुख्य यजमान मनोज शुक्ल, नीरज शुक्ला
के अलावा मुन्नी शुक्ला, उमा मिश्रा, मुन्नी देवी, ममता अग्निहोत्री और
भूमि अग्निहोत्री आदि ने महायज्ञ में आहुतियां डालीं। इस अवसर पर प्रहलाद
नरायन टंडन, राधेश्याम, कमला अग्रवाल, प्रभुनंदन मिश्रा, ममता अग्निहोत्री,
संध्या शुक्ला, माध्वी शुक्ला, सूर्य शुक्ला, गुंजन, जयकुमार शुक्ला,
प्रदीप सक्सेना, विवेक मिश्रा, सोनू मिश्रा, प्रमोद अवस्थी, राजू तिवारी,
अरविंद दीक्षित, राकेश गुप्ता और शैलेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।