भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि परशुराम किसी जाति विशेष के विरोधी नहीं थे। वह केवल आतंक फैलाने वालों के विरोधी थे। गोष्ठी से पहले सुबह हवन का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
नितगंजा स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में हुई गोष्ठी में ब्राह्मण समाज सेवा समिति के अध्यक्ष अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ ने कहा कि समाज में भगवान परशुराम के प्रति भ्रांति फैलाई गई कि वह एक जाति के विरोधी थे, जबकि वह केवल समाज की व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करने वालों के विरुद्ध थे।
महामंत्री रमेशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक ब्राह्मण का कर्तव्य है कि वे भगवान परशुराम के बताए रास्ते पर चलें। मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी ने कहा कि परशुराम ने समाज में संतुलन स्थापित करने के लिए अपना अस्त्र उठाया था। कार्यक्रम से पूर्व हवन का आयोजन किया गया और भगवान परशुराम का आह्वान किया गया। समाज के लोगों ने हवन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। हवन के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 9 मई को पंडाबाग से सायं 5 बजे परशुराम शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान डा. शिवओम अंबर, गिरीशचंद्र द्विवेदी, लालाराम दुबे, सूरज प्रकाश मिश्र, कमलेश पाठक, अभयशंकर द्विवेदी, मनमोहन मिश्र, मनोज मिश्र, सरल दुबे, रामबाबू पाठक, ओमप्रकाश मिश्र कंचन, राजेश मिश्र, राघवदत्त मिश्र, विनय दुबे, रामवीर शुक्ल, कृष्णकांत त्रिपाठी, डब्बन दुबे, कैलाश मिश्र, सुनील मिश्र, पीयूष दुबे, पदम पांडेय, सदानंद शुक्ल, सुधाकर चतुर्वेदी, दिनेश मिश्र आदि मौजूद रहे।