परिचय सम्मेलन को सम्बोधित करती बौद्ध अनुयायी
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तथागत की तपस्थली संकिसा में कार्तिक कौमुदी महोत्सव के दूसरे दिन दूर-दराज से आये बौद्ध अनुयायियों ने भदन्त विजय सोम थैरो इंटर कालेज से पद यात्रा कर स्तूप की परिक्रमा की। इसके बाद यहां मेले का आयोजन किया गया जिसमें बौद्ध की देशनाओं पर प्रकाश डाला।
तथागत की जय-जयकार के नारे लगाते हुए बौद्ध अनुयायी स्तूप के पास पहुंचे जहां उन्होंने बुद्धम शरणम गच्छामि मंत्र के साथ पूजा अर्चना की। मेले में एटा से आये सुनील दत्त शाक्य ने कहा कि तथागत की शरण में पहुंचने के बाद अंगुलिमाल संत बन गया।
थागत का कहना था कि जिस व्यक्ति ने जितनी उर्जा होती है उतनी ही जल्दी उसका रूपांतरण होता हैं केवल उर्जा को रूपांतरण करने की क्षमता होनी चाहिए जब कोयला का रूपांतरण हीरा है तो शक्ति का रूपांतरण संभव है यही वजह है कि अंगुलिमाल एक महान संत बना।
स मौके पर राधे श्याम शाक्य इटावा और होरी लाल, कप्तान सिंह शाक्य, हरिवंश सिंह शाक्य, रणवीर सिंह शाक्य, मेवाराम शाक्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके बाद महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महिला सम्मेलन में भाग लेने के लिए मुख्य अतिथि संग मित्रा मौर्य नही पहुंची।
बू सिंह कुशवाहा, शक्ति पाल सिंह शाक्य, सुरेश बौद्ध सहित भारी संख्या में बौद्ध अनुयायी, भंते मौजूद रहें। मेले में पुलिस की भारी भरकम व्यवस्था रहीं न्यायालय के आदेश के चलते बौद्ध अनुयायियों और भंते को स्तूप के ऊपर पहुंच कर पूजा करने की इजाजत नही दी गई।