फोटो-30 घेर शामू खां में टीवी पर ईरान के हालात देखते मौलाना की पढ़ाई करने गई फिज्जा आब्दी के पर
फर्रुखाबाद। ईरान में मौलाना (आलिम) की डिग्री हासिल करने गए शहर के दो परिवारों के बेटा व बेटी के परिजन चिंतित हैं। बेटे से परिजनों की बात नहीं हो पा रही थी। तड़के वॉयस मैसेज आया, तब राहत मिली। बेटी से उनके परिजनों की कुछ देर बात हुई तो तसल्ली बंधी। फिर भी दोनों बच्चों की माताएं अधिकतर समय कुरान पढ़कर अल्लाह से सलामती की दुआ मांग रही हैं।
शहर के मोहल्ला गढ़ी कोहना निवासी इस्तिखार अली रिजवी का पुत्र कासिब अली रिजवी सीतापुर के मदरसे में पढ़ रहा था। दो साल पहले उसे मौलाना की शिक्षा लेने के लिए ईरान के शहर कुम स्थित मदरसे में भेजा गया। पिछली साल 13 से 25 जून तक चले युद्ध के दौरान वह घर आ गया था। जैसे ही युद्ध खत्म हुआ, तो वह दोबारा चला गया। इस्तिखार ने बताया कि ईरान और इस्राइल में युद्ध शुरू हुआ, तो वहां का नेट बंद कर दिया गया। दो दिन से बेटे को फोन कर रहे मगर बात नहीं हो रही। सुबह पांच बजे के करीब कासिब का वॉयस मैसेज आया। उसमें सब कुछ ठीक बताया। रात के समय जयपुर में रह रही चाची से कुछ मिनट बात भी हो गई थी।
मोहल्ला घेरशामू खां निवासी टेलर मेराज हुसैन की बेटी फिज्जा आब्दी आजमगढ़ के मदरसा में पढ़ती थीं। वहां से छह माह पहले ईरान के कुम शहर स्थित मदरसा में तीन वर्षीय मौलाना की डिग्री हासिल करने गई थीं। युद्ध शुरू होने के बाद से परिजन का फोन से संपर्क टूट गया। शनिवार रात उससे कुछ देर परिजनों की बात हुई। उसने बताया कि तेहरान में हमला हुआ है। वह शहर करीब 300 किमी दूर है। शनिवार को उसके मदरसे से करीब 70 किमी दूर शिक्षण संस्थान पर हमला हुआ। फिलहाल वह पूरी तरह से सुरक्षित है। मदरसा प्रबंधन सुरक्षा के प्रबंध किए है। मोबाइल नेटवर्क बंद है। मां नफीस बेगम का अधिकांश समय कुरान पढ़ने में गुजर रहा है। हालात जानने के लिए परिजन टेलीविजन पर जमे रहते हैं। भाई जौन आब्दी और बहनें भी परेशान हैं। पिता मेराज ने बताया कि हर वक्त ईरान के हालात से दिमाग दूर नहीं होता। अल्लाह जल्द शांति कराए। सभी को सलामत रखे।
फोटो-30 घेर शामू खां में टीवी पर ईरान के हालात देखते मौलाना की पढ़ाई करने गई फिज्जा आब्दी के पर