गंगा तट पर मोक्ष की कामना लिए साधुसंत पौराणिक परंपराओं का निर्वहन करते
हुए दिखाई दे रहे हैं। साधुसंतों ने ही भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए
रखने में सदियों से बड़ी भूमिका अदा की है। ईश्वर भी इन साधकों की जमकर
परीक्षा लेता है। कड़ाके की सर्दी में जहां लोग घरों में दुबके हैं, वहीं
यह भक्ति शिरोमणि तप बल के चलते साधना में तल्लीन हैं।
बांधों से छोड़े गए
पानी से लोग घबराए नहीं, बल्कि अपना डेरा दूसरे स्थानों पर ले जाते दिख रहे
हैं। कल्पवासी गंगा मइया को मनाने के लिए पहनावन और तमाम प्रकार के
धार्मिक अनुष्ठानों में लगे हैं। जगह-जगह चल रहे अन्नदान और भंडारों से
रामनगरिया क्षेत्र दानवीरों की नगरी लगती है।
वहीं प्रशासनिक क्षेत्र में
रविवार को न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रमण से सेवा में लगे
सरकारी कर्मचारियों में नया जोश दिखा। छुट्टी का दिन होने के चलते मेला
क्षेत्र में भी काफी गहमा-गहमी रही और विकास प्रदर्शनी में लगे स्टालों को
देखकर लोगों ने जमकर सराहना की।
खूब छका गया भंडारा
बालाजी
अन्न क्षेत्र के साथ ही तमाम आश्रमों में पूरे दिन भंडारा चलते रहे। यहां
साधुसंत तथा क्षेत्र में आने वाले को प्रसाद देकर संतुष्ट किया गया। इसके
साथ ही कल्पवासियों साधुसंतों को दान-दक्षिणा व वस्त्रदान भी किए।
जन्म से नहीं होता ब्राह्मण
बच्चा
बाबा आश्रम में कथा कह रहे स्वामी ओमकारेश्वरानंद महाराज ने कहा कि वर्ण
व्यवस्था समाज के तानेबाने को बनाए रखने के लिए की गई थी। उस समय ब्राह्मण,
क्षत्रिय, वैश्य, शूूद्र जन्म से नहीं बनते थे। कर्म के अनुसार इनको वर्ण
व्यवस्था में इनको शामिल किया जाता था।
झोपड़ी में गैस, बालू में सिलेंडर
रामनगरिया
क्षेत्र में कल्पवास करने वाले गृहस्थ मिट्टी के चूल्हों का सहारा न लेकर
रसोईगैस पर खाना पका रहे हैं। सिलेंडर को सुरक्षित रखने के लिए लोगों ने
सिलेंडर को बालू में दबा दिया है। उनका कहना है कि मिट्टी के चूल्हे से गैस
चूल्हा अधिक सुरक्षित है।
जलमग्न हुए घाट
गंगा
में बढ़ते जलस्तर के चलते घाटों पर पानी भर गया है। लोगों की झोपड़ियां
पानी में डूब चुकी हैं। यहां से लोग अन्यत्र स्थानों के लिए पलायन कर रहे
हैं। लोगों का कहना है कि ईश्वर उनकी लाख परीक्षा ले लेकिन उनकी आस्था कम
नहीं होगी। वह एक माह तक डटे रहेंगे। ऐसे भी कल्पवासी आ रहे हैं, जिनकी
मनौती गंगा मइया ने पूरी की। परंपरानुसार मनौती पूरी होने पर लोग गंगा मइया
को पहनावन चढ़ाते हैं।
अलाव का सहारा
कड़ाके
की सर्दी के चलते भले ही लोग ठंड से सिहर रहे हों लेकिन हौसलों के चलते यह
लोग यहां जमे हुए हैं। सर्दी से लड़ने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे
है। प्रशासन की ओर से भले ही लकड़ी उपलब्ध न कराई जाती हो लेकिन लकड़ी
खरीदकर कई भक्त मेला क्षेत्र में अलाव जलवा रहे हैं।
वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण संदेश
वैदिक
क्षेत्र में चल रहे योग शिविर में हरियाणा से आए प्रदीप शास्त्री ने
महर्षि दयानंद सरस्वती के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि ने
समाज को एक नई दिशा दी। इससे गरीबों का भला हुआ। उन्होेंने कह कि व्यक्ति
के जीवन में चरित्र का सबसे अधिक महत्व होता है। चरित्र से पतित व्यक्ति को
कोई भी पसंद नहीं करता।
संस्कार भारती ने सजाई मनमोहक रंगोली
संस्कार
भारती के कलाकारों ने मेला के सांस्कृतिक पांडाल के बाहर मनमोहक रंगोली
सजाई। इसमें भारत का मानचित्र एवं सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे कई रंगों का
प्रयोग करते हुए आकर्षक रंगोली सजाई गई। जिलाधिकारी एनकेएस चौहान ने
संस्कार भारती के कलाकारों की प्रशंसा की। इस दौरान पूर्व विधायक महरम
सिंह,
अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, अतुल कपूर, आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल,
सत्यनरायन मिश्र मधुप, पप्पन मियां और रंजीत चक आदि मौजूद रहे।
मेला क्षेत्र में रही गहमा-गहमी
रविवार
को छुट्टी का दिन होने के चलते मेला क्षेत्र में विभिन्न दुकानों पर
खरीददारी हुई। मनोरंजन के कार्यक्रमों का लोगों ने लुत्फ उठाया। यहां चल
रहे कार्यक्रमों का मजा प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारियों ने भी उठाया।
जिलाधिकारी ने मौत का कुआं में करतब दिखाते कलाकारों को नगद पुरस्कार से
सम्मानित किया।