तहसील क्षेेत्र के गांव जटपुरा में मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। सरकारों
का हर गांव को बिजली देने का दावा यहां झूठा साबित हो रहा है। आजादी के बाद
से अब तक इस गांव में बिजली के खंभे तक नहीं लगे हैं। विकास के नाम पर
सड़कें और नालियां भी खस्ताहाल हैं।
गांव में बिजली न होने से लोग इस गांव
में रिश्ता जोड़ने से भी कतराते हैं। जो बेटियां ब्याहकर आई भी हैं, उनके
मायके से मिला दहेज का इलेक्ट्रानिक्स सामान धूल फांक रहा है। बड़े-बूढ़े
बिजली न होने के चलते रात के अंधेरे में टार्च की रोशनी का प्रयोग करते
हैं। सपा सरकार की ओर से दिए गए लैपटॉप भी निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं।
यह गांव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जटपुरा गांव की हालत बयां करती रपट-
मोबाइल चार्ज करने जाते दूसरे गांव
गांव
जटपुरा में 1200 की आबादी है। इसमें 500 वोटर हैं लेकिन विकास का पहिया
रुका हुआ है। आजादी के बाद से अभी तक गांव में बिजली आपूर्ति तो दूर, खंभे
तक नहीं लगे हैं। रात होते ही गांव में अंधेरा पसर जाता है। पड़ोसी के घर
जाना हो तो टार्च जलानी पड़ती है।
हालांकि कुछ लोगों ने सोलर लाइटें लगवा
रखी हैं लेकिन यह नाकाफी साबित होती हैं। मोबाइल चार्ज कराने के लिए
ग्रामीण सोलर लाइट का सहारा लेते हैं। सोलर लाइट के भी काम न करने पर दो
किलोमीटर दूर गांव करनपुरदत्त, मुजहा और अमृतपुर में जाकर लोग मोबाइल चार्ज
करने को मजबूर हैं।
कलर टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन फांक रहे धूल
गांव
के सरोज कुमार की शादी 10 साल पहले हुई थी। दहेज में कलर टेलीविजन और
सीलिंग फैन मिला था। दोनों पैक रखे हैं। सरोज कुमार कहते हैं कि गत्ते
चूहे ने काट दिए हैं। कलर टेलीविजन कभी चला ही नहीं। अब तो यह भी भरोसा
नहीं कि वह ठीक चलेगा भी या नहीं। बैट्री से छोटी ब्लैक एंड व्हाइट
टेलीविजन चला लेते हैं।
विवेक ने बताया कि उनकी शादी पांच साल पहले हुई
थी। दहेज में कलर टेलीविजन, फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन मिला था। सभी पैक रखे
हैं। पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि मायके से जो सामान मिला वह शो पीस बना
रखा है। बेकार में ही इन चीजों में पैसा फंस गया। यही पैसा अगर मायके वाले
बैंक में डाल देते तो आज रकम दोगुना हो जाती।
पड़ोसी गांव जाना पड़ता गेहूं पिसाने
जटपुरा
गांव में बिजली न होने से आटा चक्की भी नहीं लगी हैं। गेहूं पिसाने के लिए
ग्रामीणों को दो किलोमीटर दूर करनपुरदत्त और अमृतपुर गांव जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव में कुछ लोग पंपसेट से चक्की चलाते थे
लेकिन पड़ता न पड़ने के चलते उन्होंने भी चक्की बंद कर दीं। आटा पिसाने के
लिए पड़ोसी गांव जाना पड़ता है।
कई बार कर चुके मांग
गांव में
बिजली चालू किए जाने की मांग कई बार ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और आला अफसरों
से कर चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। गांव के सूरज कुमार, नरेंद्र
कुशवाह, देवेंद्र कुशवाह, रंजीत कुशवाह, राजेश्वर कुशवाह, विपिन कुमार और
रामचंद्र कुशवाह का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों से बिजली की मांग कर
चुके हैं।
अपने जीवन में नहीं देख सकेंगे बिजली
गांव में कई
बुजुर्ग ऐसे हैं जो उम्र के आखिरी पड़ाव में हैं। इनका कहना है कि अपने
जीवन में वह गांव में बिजली नहीं देख सकेंगे। 80 वर्षीय जयसिंह, 70 वर्षीय
राजकुमार ने बताया कि सरकारें हर गांव को बिजली देने का वादा करती हैं
लेकिन उनके गांव में आज तक बिजली नहीं आई है। अपने जीवन में तो शायद वह लोग
बिजली नहीं देख सकेंगे।
बिजली ने रखा कुंवारा
जटपुरा गांव
में बिजली न होने के चलते यहां कई युवा शादी की उम्र में कुंवारे घूम रहे
हैं। होरीलाल, रामशंकर, राहुल कुमार, बालेश्वर और रंजीत कुमार का कहना है
कि गांव में बिजली न होने के चलते उनकी अभी तक शादी नहीं हुई है। रिश्ते
आते हैं लेकिन लौट जाते हैं।
सरकार के दिए लैपटॉप बंद पड़े
गांव
जटवारा निवासी विशुनदयाल की भाभी शिववती और धर्मेंद्र कुमार को सपा सरकार
में लैपटॉप मिला था। लेकिन बिजली न होने के चलते लैपटॉप बंद हैं। इन लोगों
ने बताया कि सपा सरकार में लैपटॉप मिला था लेकिन बिजली न होने के चलते शो
पीस बने हैं। दूसरे गांव से कभी-कभार चार्ज कर इसका इस्तेमाल कर लेते हैं।
वर्जन
एक्सईएन
देहात अमर सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी है। राजीवगांधी विद्युतीकरण
योजना से गांव में बिजली पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।