सीरत कमेटी ने जलसा-ए-इस्तकबाल का आयोजन कर हज करके लौटे 40 हाजियों का सम्मान किया। उन्हें फूलमाला पहनाकर शॉल ओढ़ाई। मुफ्ती शमशाद अहमद चतुर्वेदी ने हज के बारे में विस्तार से बताया।
टाउनहाल स्थित काजी मस्जिद में हुए आयोजन में मुफ्ती शमशाद अहमद चतुर्वेदी ने कहा कि हज के द्वारा अल्लाह व उसके रसूल के घर तथा अन्य पवित्र स्थलों की जियारत हो जाती है। इससे पहले सीरत कमेटी के पूर्व सदर कारी शाह फसीह मुजीबी ने शेर पढ़कर दाद लूटी।
कमेटी के सदस्य हाजी शराफत खां, मोहम्मद हसीन, जुबैर अंसारी, शफीक हुसैन, रफी अहमद अंसारी, आसिफ कुरैशी, फैशल रईस, खुर्शीद अहमद, इशरत मीर खां, मशकूर खां, अफरोज आलम, शाहिद हुसैन, मुख्तार अहमद, चांद खां आदि ने हाजियों को सम्मानित किया।
इस मौके पर हाजी लियाकत हुसैन, हाजी दिलदार हुसैन, डॉ. मोहम्मद मोहसिन, मिर्जालाल मियां, अजहर अली खां, हिलाल मुजीबी, हाजी राजा शम्सी, वसीम जमा खां, हाजी फुंदू, हाजी इसरार अहमद, इक्तिदार अली, शाहिद हुसैन, शकील कुरैशी, राशिद मुजीबी, असगर हुसैन, नवीशेर आदि मौजूद रहे।
इन हाजियों को मिला सम्मान
कमेटी ने डॉ. मुजम्मिल सिद्दीकी, सैय्यद इरफान अली, इमरान खां, अजहर हुसैन, निहाल अहमद, मोहम्मद तौफीक, अनीस अहमद, रियासत बली, हाजी खलील, शफीक अहमद, अब्दुल मुबीन नूरी, उबैद फारुकी, मुशीर हुसैन, रजीउल्ला खां समेत 40 हाजियों को सम्मानित किया।
कमेटी भंग, चुनाव छह को
सीरत कमेटी के सदर कारी शाह फसीह मजीबी ने बताया कि कमेटी का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो गया। लिहाजा कमेटी भंग कर दी गई। कमेटी के सरपरस्त काजी मुताहिर अली, हाजी शराफत खां, मोहम्मद हसीन, इंतजार अली खां की देखरेख में छह अक्तूबर को बैठक होगी। इसी दिन नई कमेटी पर विचार-विमर्श किया जाएगा।