फर्रुखाबाद। अंजुमन गुलामाने ताजदारे करबला की ओर से दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के मैदान में गुरुवार रात जलसे का आयोजन किया गया। जलसे की श्ुारुआत कारी हारून ने तिलावते कुरान से की। इस दौरान शायरों ने कलाम पेश किए।
हिलाल मुजीबी ने यह कलाम ‘रहबरे राहे इमामत का सफर सजदे में है, करबला वालों का प्यासा घर का घर सजदे में है, सुनाकर वाहवाही लूटी।
इलाहाबाद से आए गुलाम नूरे मुजस्सम ने यह कलाम ‘आशिकों का नारा है शब्बीर हमारा है’ सुनाया। लतीफ कमालगंजवी ने यह कलाम ‘अजीब शान से काबे का कारवां निकला है, आफताब कादरी ने सब कुफ्रो जलालत की दीवार गिराने को, शब्बीर चले आए इस्लाम बचाने को’ सुनाया। काजी सैय्यद मुताहिर अली ने यह कलाम ‘हक-ओ बातिल का पता आपकी हस्ती से चला, आप के नाम हम लोग मुस्लमां हैं हुसैन, सुनाया।
कानपुर से आए मौलाना हाशिम अशरफी ने मदीने से करबला तक के सफर को बयां किया। मौलाना ने कहा कि ईमान वालों की अल्लाह हमेशा मदद करता है। उन्होंने कहा कि सब्र करने वालों के साथ अल्लाह है। मौलाना ने कहा कि दुनिया का सबसे पहला आतंकी यजीद था। उन्होंने कहा कि यजीद इमाम हुसैन का हाथ काटकर ले जाना चाहता था।
मौलाना ने कहा कि इस्लाम की रक्षा करने वाले हुसैन का हाथ 22 हजार फौज रखने वाला यजीद नहीं ले जा सका। जलसे में अख्तर अली, कारी तनवीर, सज्जादानशीन शाह फसीह मुजीबी, हाजी इस्लाम अवी, असलम नबाव, अरशद, हाजी भोले खां, असलम शेर खां, ताहिर खां, बंटू, गालिब, शारिक, अदनान, महजर, हसनान मुजीबी, सैफ अली आदि मौजूद रहे। जलसे की अध्यक्षता मौलाना गालिब मियां ने तथा संचालन हाफिज शाहिद रजा ने किया।