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आईजी की फटकार के बाद एएसपी को दी गई जांच

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आईजी जोन से मिली फटकार के बाद साढ़े तीन वर्ष तक बिना ड्यूटी के सिपाही का वेतन निकलने के मामले में एएसपी को जांच सौंपी गई है। सीओ सिटी ने जांच कर चार आरआई समेत 12 पुलिस कर्मियों को दोषी बताया था। घटना में सीओ लाइन स्वयं पर्यवेक्षण करते हैं तो जांच सीओ से ऊपर के अधिकारी को करनी चाहिए थी। आईजी ने जांच शीघ्र कर इस मामले में आख्या देने के आदेश दिए हैं।
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कानपुर नगर के थाना शिवराजपुर के गांव कपूरपुर निवासी सिपाही नरेश यादव 4 अप्रैल 2016 को पुलिस लाइन से थाना जहानगंज में तबादले पर रवानगी के बाद से लापता हो गया था। उसके बाद से बिना ड्यूटी के उसका वेतन निकलता रहा। 14 दिसंबर 2019 को जब सिपाही की मौत हो गई तो पत्नी ने आरआई को जानकारी दी।
इसके बाद डीएम के आदेश पर सीओ सिटी ने जांच कर चार आरआई समेत बारह लोगों को दोषी बनाकर रिपोर्ट एसपी के पास भेज दी थी। तबसे एसपी कार्रवाई को लेकर अभियोजन अधिकारी समेत कई लोगों से मंथन कर चुके हैं। 24 जनवरी को आईजी जोन मोहित अग्रवाल गंगा यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने आए थे। तब इस बारे में आईजी से पूछा गया था।
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उन्होंने जिले के अधिकारियों से जानकारी न मिलने की बात कही थी। उसी दिन शाम को आईजी ने लाइन में बैठक कर इस प्रकरण में अफसरों को फटकार लगाई और शीघ्र कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। अब जांच एएसपी त्रिभुवन सिंह को सौंप दी गई है। अब एएसपी सभी आरआई व पुलिस कर्मियों के फिर से बयान दर्ज कर जांच करेंगे।
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