मेला श्री रामनगरिया क्षेत्र में एक माह से चल रहीं तैयारियां पूर्ण नहीं
हो पाई हैं। अधूरी तैयारियों के बीच सोमवार को दोपहर बाद 3 बजे मेला का
उद्घाटन होगा। माघ माह का पहला स्नान होने से कल्पवासियों के साथ-साथ
आसपास जनपदों से भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
भीड़ पर नजर रखने के लिए
अभी वाच टावर नहीं बनाए गए हैं। रविवार क ो पूरे दिन तैयारियंा चलती रहीं।
भीड़ उमड़ने के चलते पुलिस प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। माघ मास के
पहले स्नान का पुण्य कमाने के लिए शाहजहांपुर, बदायूं, एटा, बरेली के
साथ-साथ कई जनपदों व प्रांतों के लोग उमड़ते हैं। कल्पवास इलाके में घाट की
ओर बैरीकेडिंग अभी तक नहीं हो पाई है।
नाव बनाने वाले जुटे
मेला
क्षेत्र में नाव पर सवारी करने के लिए नाविकों ने नई नाव बनाने का काम भी
शुरू कर दिया है। नाविक जीशान ने बताया कि मेला क्षेत्र में करीब 100 नावों
की अतिरिक्त आवश्यकता पड़ती है। एक नाव बनाने में करीब 15 से 20 हजार की
लागत आती है।
हैंडपंप खराब
मेला समिति द्वारा कल्पवासियों व
आने-जाने वाले लोगों के पेयजल के लिए 300 हैंडपंप लगवाए गए हैं लेकिन इनमें
से कई हैंडपंप खराब हैं।
नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे
मेला समिति
की ओर से मेला पर नजर रखने के लिए 15 सीसीटीवी कैमरा लगने थे। इसका ठेका भी
उठाया गया था। लेकिन अभी भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। मेला
प्रभारी का कहना है कि 6 जनवरी से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
पुल के गड्ढाें की पैचिंग
मेला
क्षेत्र में पहुंचने के लिए पांचाल घाट के पुल के मार्ग में जगह-जगह गड्ढे
हैं। इन गड्ढों से सबसे ज्यादा दिक्कत पैदल चलने वालों को होगी। इनकी
पैचिंग कराई गई।
कल्पवासियों के क्षेत्र में लाइटों का काम अधूरा
कल्पवास
क्षेत्र में रात में लोगों को कोई असुविधा न हो इसके लिए मार्ग में
जगह-जगह लाइटें लगनी थीं लेकिन यह कार्य भी अभी अधूरा पड़ा है। कई
क्षेत्रों में तो शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है।
नहीं लगी सरकारी राशन की दुकानें
विभिन्न
क्षेत्रों में हजारों कल्पवासी डेरा डाल चुके हैं। यह लोग कई दिन से महंगे
दर पर मिट्टी का तेल खरीदने को मजबूर हैं। मेला प्रभारी ने बताया कि मेला
क्षेत्र के लिए 15 दुकानें आवंटित की गई हैं। 6 जनवरी से कार्ड बनाए
जाएंगे।
बच्चे चला रहे नाव
शहरवासियों को मेला क्षेत्र में
जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। गंगापार कराने के लिए नाविकों ने
अपने बच्चों को भी लगा रखा है। हालांकि प्रशासन की ओर से बच्चों के नाव
चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।