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मीरा जाटव की मौत के मामले में मुंशी से लेकर विवेचक तक होंगे तलब

Thu, 04 May 2017 01:00 AM IST
अमर उजाला
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मीरा जाटव (फाइल फोटो)
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पड़ोसी जिला कन्नौज के थाना गुरसहायगंज के मलिकपुर की रहने वाली मीरा जाटव की मौत के मामले में पुलिस महकमे में एक बार फिर खलबली मच गई है। इस चर्चित हत्याकांड की जांच मानवाधिकार आयोग को चले जाने से पुलिस इस केस से संबंधित पत्रावलियों को खंगालने में जुट गई है।
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मीरा जाटव के खिलाफ 29 अप्रैल 2016 को कमालगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सालिगराम वर्मा ने अपनी जानमाल का खतरा दिखाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। 30 अप्रैल को उसे 500 ग्राम नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। न्यायालय में पेशी पर लाने के बाद जेल ले जाते समय मीरा जाटव पुलिस की जीप से गिरकर घायल हो गई। करीब एक सप्ताह बाद कानपुर के हैलट अस्पताल में मीरा की मौत हो गई थी।

उसके पिता रामदास ने कमालगंज के थानाध्यक्ष सालिगराम वर्मा, छेदालाल एचसीपी, रामबली, महिला सिपाही नारायण देवी, यासीन और शमसुल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की विवेचना करने वाले दरोगा हरिओम तथा हत्या की विवेचना करने वाले तत्कालीन अमृतपुर के सीओ कालूराम दोहरे, एफआईआर लेखक सर्वेश तथा इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने वाले कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्राधिकारी को तलब किया गया है।
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अब तक मीरा जाटव के खिलाफ दर्ज मुकदमे और उसके पिता द्वारा दर्ज कराए गए हत्या के मुकदमे की प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति भी मानवाधिकार आयोग ने मांगी है। हत्याकांड के एक साल बाद फिर मामला गरमा जाने से पुलिस महकमे में हड़कंप है।
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