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Farrukhabad News: 11 साल में चार किमी चली गंगा की धार, अब पंखियन मड़ैया पर वार

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गांव को जोड़ने वाली डिप पर भरा बाढ़ का पानी।  - फोटो : स्रोत सूचना विभाग
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फर्रुखाबाद। 11 साल पहले चार किमी दूर गंगा की धार अब पंखियन की मड़ैया पर वार कर रही है। गांव की सड़क तक पहुंचने में तीन मीटर दूरी बची है। इससे 40 घरों में रह रहे लोग आवागमन को लेकर चिंतित हैं। धार से चंद कदम दूर रखा ट्रांसफार्मर भी गंगा में गिरने की आशंका है। आधा घंटे में पांच मीटर से अधिक कटान करने वाली गंगा में एक मुख्यमंत्री आवास लटक रहा है। ग्रामीण दहशत में रात गुजार रहे हैं।
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गंगा की धार इतनी तेज कटान करती है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण कटरी धर्मपुर ग्रामसभा के मजरा पंखियन की मड़ैया में देखने को मिला। दो साल में गांव के 58 मकान, कब्रिस्तान गंगा में समा चुका है। इस बार दो पक्के मकान और एक झोपड़ी का अस्तित्व मिट गया। 10 मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। गंगा की धार कितनी तेज कटान करती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। एक अगस्त को सुबह 10 से साढ़े 10 बजे यानी आधा घंटे में मदरसा जामिया बास्तिया गंगा में समा गया।
अब गांव के ही जाकिर का मुख्यमंत्री आवास धार में लटक रहा है। हालात ऐसे हैं कि गंगा की धार से तीन मीटर दूर मुख्य सड़क बची है जबकि ट्रांसफार्मर चंद कदम दूर है। सड़क कटने के बाद करीब 40 मकानों को आने-जाने का रास्ता बंद होना तय माना जा रहा है। इससे उन्हें घरों से सामान निकालने और भागने का रास्ता तक नहीं मिलेगा।
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ग्राम प्रधान शहनाज के पति शाहिद अली बताते हैं कि मदरसा की स्थापना 2014 में हुई थी। उस वक्त गंगा की धार करीब चार किमी दूर ला्यकपुर सबलपुर में थी। 11 साल में गंगा का प्रकोप इस कदर बढ़ा कि अब तक करीब आधे गांव का नामोनिशान मिट चुका है। यदि यही हाल रहा, तो आने वाले महीनों में पूरा गांव वीरान होने की आशंका सजा रही है।

पैंटून से कटान रुकने की उम्मीद
-डेढ़ फीट बढ़ा पानी, प्राइमरी स्कूल और डिप पर पहुंची बाढ़
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद। गंगा के मुहाने पर आए 10 मकानों को बचाने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर दूसरे दिन रविवार को कोई प्रयास शुरू नहीं किए गए। ग्रामीण प्रशासन की हर जुगाड़ को नाकाम होना मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कटान क्षेत्र में पैंटून लगा दिए जाएं तो हर हाल में कटान रुक जाएगा। रविवार सुबह तक करीब डेढ़ फीट जलस्तर बढ़ गया। प्राइमरी स्कूल और डिप पर पानी बहने लगा है।
एक अगस्त को गंगा के तेज कटान के बाद जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने सिंचाई विभाग को हर हाल में कटान रोकने के उपाय करने निर्देश दिए थे। रविवार को दूसरे दिन किसी भी अधिकारी ने सुध नहीं ली। रात में करीब डेढ़ फीट जलस्तर बढ़ गया। ग्रामीण कटान की गति को हर पल निहार रहे हैं। उन्हें अपने आशियानों को लेकर चिंता सता रही है। गांव में प्राइमरी स्कूल में पानी घुसने लगा है। गांव के बुजुर्ग अबरार ने बताया कि बांस बल्ली कोई काम करने वाली नहीं है। पांचाल घाट से पैंटून लाकर हर 20-25 मीटर पर खड़े कर दिए जाएं तो कटान हर हाल में रुक जाएगा।
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फोटो- मौलाना शहरोज खान
मदरसा के मौलाना शहरोज खान कहते हैं कि पहली बार इतनी तेज कटान देखा है। कुछ सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला। मकान व मदरसा की मिट्टी भराव में दो लाख रुपये खर्च किए। लाखों रुपये से भवन बनवाया। चंद मिनट में ही नेस्तनाबूत हो गया। अब वह मस्जिद में रात गुजारते हैं जबकि बच्चे इधर-उधर मिलने वालों के घरों में हैं। 11 साल पहले मदरसा बना, तब बाइक से चार किमी दूर गंगा तक जाते थे। अब गंगा का रौद्र रूप उनकी बर्बादी बनकर टूट रहा है।

हाईवे चिह्नांकन पिलर भी गंगा में समाया
पंखियन की मड़ैया से पूर्व में करीब 700 मीटर दूर लिंक एक्सप्रेस-वे का पिलर लगाया गया था। गंगा की धार में वह पिलर भी समा गया है। वन विभाग के वन क्षेत्र में लगे शानदार शीशम के हजारों पेड़ धार में बह चुके हैं। अब चंद बचे पेड़ों को भी खतरा बना हुआ है।
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