कायमगंज में तंबाकू की खेती को समेटने के लिए कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय
संजीदा है, क्योंकि इसकी खेती में अन्य फसलों की अपेक्षा यूरिया खाद की खपत
ज्यादा होती है। इससे खेतों की मिट्टी की सेहत तो खराब हो ही रही है,
तंबाकू कुटान से मजदूरों की सेहत भी बिगड़ रही है। तंबाकू की खेती रोकने व
इलाकाई किसानों को विकल्प देने के लिए 16 सितंबर को नई
दिल्ली के कृषि भवन
में होने वाली विशेषज्ञों की बैठक में यह मामला उठेगा। कायमगंज उत्तर
भारत का सबसे बड़ा कच्ची तंबाकू उत्पादक इलाका है। जिले की तहसील कायमगंज
इलाके में 3288 हेक्टेयर में तंबाकू की फसल होती है। कायमगंज के अलावा
शमसाबाद व नवाबगंज के किसान भी तंबाकू की पैदावार करते हैं। ज्यादा फसल
लेने के लिए किसान बड़े पैमाने पर
यूरिया खाद डालते हैं। यही वजह है कि
2010-2011 तक एक हेक्टेयर में 50.32 क्विंटल तंबाकू उत्पादन होता था, अब यह
बढ़ कर 54.8 हेक्टेयर प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। जम्मू-कश्मीर,
तमिलनाडु, असम, गुजरात व दिल्ली में कायमगंज की तंबाकू की बड़े पैमाने पर
खपत होती है।
डीडी कृषि एके सिंह ने बताया कि भारत सरकार जिले में
तंबाकू की खेती को लेकर चिंतित है। नई दिल्ली में 16 सितंबर को होने वाली
बैठक में वैकल्पिक खेती का रास्ता निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान
तंबाकू की जगह आलू, लहसुन, सतावर, सर्पगंधा, सफेद मूसली, लहसुन व प्याज की
खेती कर सकते हैं। ये फसलें इलाकाई किसानों के लिए मुफीद भी हैं।