फर्रुखाबाद। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की सेवाएं बदहाल हैं। यहां न तो फिजीशियन हैं और न ही विशेषज्ञ डॉक्टर। मरीजों को उपलब्ध संसाधनों का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीजों और जोखिम वाले प्रसव के मामले जिला अस्पताल रेफर करने पड़ते हैं। यह हाल तब है कि जबकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनप्रतिनिधियों ने अस्पतालों को गोद ले रखा है।
सीएमओ के अधीन आने वाली स्वास्थ्य इकाइयों में डॉक्टरों के 130 पद सृजित हैं। इनमें 52 पद विशेषज्ञ डॉक्टरों के हैं। इसमें दो विशेषज्ञ डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस के लिए होने चाहिए। फिजीशियन, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट व स्त्री रोग होना जरूरी है। इसके उलट सिविल अस्पताल लिंजीगंज, सीएचसी फतेहगढ़, बरौन, कमालगंज, राजेपुर, मोहम्मदाबाद, नवाबगंज, शमसाबाद, सीएचसी कंपिल में विशेषज्ञों के सभी पद खाली हैं। कायमगंज सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है, लेकिन अन्य विशेषज्ञों के पद खाली हैं। किसी भी सीएचसी में ऑपरेशन नहीं किए जाते हैं। प्रसव के गंभीर मामलों में गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि 50 डॉक्टरों की नियुक्ति है। इन्हीं से प्रशासनिक व स्वास्थ्य सेवाओं का काम चलाया जा रहा है। खाली पद भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
130 पद हैं सृजित
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) व सीएचसी के लिए डॉक्टरों के 130 पद सृजित हैं। वर्तमान में नियुक्त 50 में सीएमओ सहित आठ डॉक्टर प्रशासनिक कार्य में लगे रहते हैं। बचे 42 डॉक्टरों के सहारे 27 पीएचसी और 10 सीएचसी संचालित हैं। इनमें भी कुछ डॉक्टर यदा कदा ही ड्यूटी जाते हैं।
लोहिया मेें भी डॉक्टरों की कमी
लोहिया अस्पताल (जिला अस्पताल) में भी डॉक्टरों की कमी है। यहां 29 पदों के सापेक्ष मात्र 13 डॉक्टर तैनात हैं। यहां भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है।
तीन डॉक्टर चला रहे सीएचसी
राजेपुर। सीएचसी में दो स्थायी और एक संविदा चिकित्सक तैनात है। यहां ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीज पहुंचते हैं। 20 से 30 एक्सरे भी किए जाते हैं। एक्सरे टेक्नीशियन सतीश कुमार ने बताया कि बिजली न होने पर एक्सरे रुक जाते हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रमित राजपूत ने बताया कि अस्पताल के सहायक दंत चिकित्सक की ड्यूटी दूसरी जगह लगा दी गई है।
पीकू वार्ड व एक्सरे कक्ष में लटका ताला
मोहम्मदाबाद सीएसची में पांच डॉक्टर हैं। बुधवार को पीकू वार्ड व एक्सरे कक्ष में ताला पड़ा था। तीनों फार्मासिस्ट सुबह 10 से 12 बजे तक हड़ताल पर रहते हैं। बुधवार को डॉ. सौरभ कटियार व सनी मिश्रा ड्यूटी के दौरान अपने आवास पर थे। सीएचसी प्रभारी डॉ. गौरव यादव ने बताया कि अस्पताल में सभी प्रकार की जांचें की जा रही हैं। मां का देहांत होने से एक्सरे टेक्नीशियन प्रदीप कुमार छुट्टी पर हैं, इसीलिए एक्सरे रूम में ताला लगा है। (संवाद)
लोहिया में मरीजों के लिए कंबल की कमी
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष और महिला अस्पताल में पर्याप्त कंबल न होने से मरीजों को घर से कंबल व रजाई लानी पड़ती है। अस्पताल के कंबल बहुत हल्के भी हैं, जिससे मरीजों को ठंड से राहत नहीं मिलती है। अस्पताल के आर्थो वार्ड में मंगलवार रात करीब पौने 10 बजे चार मरीज भर्ती थे। दो बेडों पर तीमारदार घरों से लाए कंबल ओढ़कर लेटे थे। मरीजों के पास अस्पताल से मिला एक-एक कंबल था। मरीज घरों से लाए कंबल और रजाई ओढ़े लेटे थे। कुछ मरीजों को मंगलवार को ही एक कंबल दिया गया था।
सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने कहा कि कंबलों की कमी नहीं है। मरीज मांग करेगा, तो दूसरा कंबल दिया जाएगा। मरीज को परेशानी नहीं होने देंगे। मैं खुद मरीजों से बात करूंगा।
मरीजों का दर्द
हरदोई के हरपालपुर क्षेत्र के गांव कैखाई निवासी वृद्ध डोलम का पैर टूट गया था। वह पांच दिन पहले भर्ती हुए थे। बताया कि अस्पताल से एक कंबल मिला, दूसरा घर से मंगवाया। अब ठंड से राहत है।
फतेहगढ़ के मोहल्ला ग्वालटोली निवासी आदेश के पैर में सेप्टिक है। वह 13 नवंबर से भर्ती हैं। बताया कि घर से एक कंबल आ गया था। कई बार कहने पर भी यहां से कंबल नहीं मिला था। मंगलवार को कंबल मिला।
मिर्जापुर गांव (शाहजहांपुर) के पिपरिया नवादा के पवन भी अस्पताल में भर्ती हैं। पवन को भी मंगलवार को एक कंबल मिला। उनके पिता सतीश ने बताया कि घर से लाए कंबल से सर्दी से बचाव कर रहे हैं।
रैन बसेरों में वन-स्टाप सेंटर और रसोईघर
लोहिया महिला और पुरुष अस्पताल में तीमारदारों के लिए रैनबसेरे बनाए गए थे। महिला अस्पताल के रैन बसेरा में वन स्टाप सेंटर खोल दिया गया। पुरुष अस्पताल के रैन बसेरा में रसोई चल रही है। सर्द रातों में तीमारदार वार्डों के बाहर फर्श पर लेटते हैं। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. कैलाश दुल्हानी ने कहा कि अस्पताल में रैन बसेरा की अच्छी व्यवस्था थी। फिलहाल जिला प्रोबेशन अधिकारी को अस्थायी रूप से वन स्टाप सेंटर के लिए दे दिया है। खाली होते ही तीमारदारों के लिए व्यवस्था की जाएगी।