बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल तो बर्बाद हुई ही, साथ
ही हरी सब्जियों को भी नुकसान हुआ है। इससे हरी सब्जी के दाम 5 से 15 रुपये
किलो बढ़ गए हैं।
हालांकि आलू के दाम में कोई इजाफा नहीं हुआ है।
दालों के दाम में आठ से इस फीसदी उछाल आया है। हरी सब्जियों के दाम बढ़ने
से दुकानदार भी परेशान हैं। आलू गरीबों सहारा बना है।
बेमौसम बरसात
ने महंगाई बढ़ा दी है। हरी सब्जियों के साथ-साथ दालों के दाम भी बढ़ गए
हैं। आठ रुपये किलो बिकने वाली लौकी 15 रुपये और 30 रुपये किलो बिकने वाला
करेला व शिमला मिर्च 50 रुपये किलो बिक रही है। 20 रुपये किलो बिकने वाले
बैंगन के दाम 30 रुपये हो गए हैं।
हालांकि आलू के दामों में कोई
इजाफा नहीं हुआ है। 3797 प्रजाति का आलू 10 रुपये का डेढ़ किलो और चिप सोना
आलू 8 रुपये किलो बिक रहा है। दाम बढ़ने से गरीब तबके के लोगों की थाली से
हरी सब्जियां गायब होती जा रही है।
पल्ला सब्जी मंडी में सब्जी
खरीदने आईं गृहणी नीरज देवी ने बताया कि 100 रुपये में दो-तीन प्रकार की ही
हरी सब्जी आ पाती है। यह सब्जी बमुश्किल दो या तीन दिन ही चलेगी।
सब्जी
दुकानदार जवाहरलाल प्रजापति ने बताया कि बरसात होने से हरी सब्जियों के
दाम बढ़े हैं। फुटकर में तो ग्राहक मोलतोल और छांट बीन कर लेता है। हम लोग
बड़ी मंडी में थोक में सब्जी खरीदने जाते हैं तो आढ़ती छांट बीन नहीं करने
देता है। एक धड़ी (पांच किलो) से कम सब्जी भी नहीं मिलती है।
भिंडी,
तोरई 170 से 180 रुपये धड़ी और टमाटर और बैंगन 130 रुपये धड़ी मिलता है।
रोजाना तीन-चार हजार की सब्जी थोक में लाते हैं। सब्जी महंगी होने के चलते
पूरी बिक भी नहीं पाती है, जिससे सब्जी खराब हो जाती है और नुकसान उठाना
पड़ता है।
उधर, पखवारे भर में अरहर, काली, उर्द धुली, मसूर और चना
दाल के दाम बढ़े हैं। राशन विक्रेता सुनीला सक्सेना ने बताया कि दालों में
10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।