मूसलाधार बारिश से गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई थी।
गुरुवार को धूप निकली तो ग्रामीणों ने खेतों में फसल फैलाकर सुखाना शुरू कर
दिया है। शमसाबाद में तो गुरुवार को भी कुछ देर बूंदाबांदी हुई।
इससे
किसान परेशान हो गढ। खेत में कटनई के बाद पड़े गेहूं और खेत में खड़ी
गेहूं की फसल सूखने में करीब तीन से चार दिन का समय लगेगा। सूखने के बाद
गेहूं की बाली काली पड़ने की आशंका है। ग्रामीण इलाकों में लोग फसल सुखाने
में तेजी से लगे हैं। पेश है अमर उजाला की पड़ताल करती रपट:-
अमृतपुर
में बीते दिन बरसात में भीगी फसल अभी तक सूखी नहीं है। गुरुवार को धूप
निकलते ही किसानोें ने फसल सुखाना शुरू कर दी है। किसान राजेश कुमार,
वीरभान सिंह, रामकुमार चौहान, रामनरेश मिश्र और राजवीर का कहना है कि मौसम
अगर खुला रहा तो फसल सूख जाएगी। फिर से पानी बरसा तो गेहूं पूरी तरह सड़
जाएगा।
गांव राजेपुर के विनोद कुमार जाटव ने बताया कि छह बीघा खेत
में गेहूं की फसल की है। तीन बीघा फसल काट चुका था। बची हुई तीन बीघा फसल
बरसात में भीग गई।
गुरुवार को धूप निकली तो गेहूं को सूखने के लिए
खेत में फैला दिया है। सूखने पर गेहूं काला पड़ सकता है। राजीव जाटव निवासी
राजेपुर ने बताया कि 18 बीघा खेत में गेहूं की फसल की है। 12 बीघा गेहूं
खंदाई करने पर मात्र 21 क्विंटल गेहूं निकला था।
गांव रशीदपुर तराई
निवासी दुर्वेश कुमार ने बताया कि 10 बीघा गेहूं की फसल बीते दिन बरसात
में भीग गई थी। गुरुवार को फसल सुखाने के लिए फसल के गठ्ठरों को जैसे ही
खोला तो फिर से बूंदाबांदी होने लगी। इस पर दोबारा गठ्ठर बांध दिए। गनीमत
रही कि पानी नहीं बरसा।
धूप अगर ठीक निकलती है तो तीन-चार दिन में
फसल सूखेगी। सर्वेंद्र अवस्थी, पप्पू निवासी सरफारपुर, कल्लू, छोटेलाल,
जितेंद्र कुमार निवासी ऊगरपुर का कहना है कि धूप निकलते ही फसल सुखाने में
सुबह से ही लगे हैं।