जिले की स्वास्थ्य सेवाआें का बुरा हाल है। मरीजों की तादाद बढ़ रही है,
डाक्टर सहित दूसरे स्टाफ का टोटा है। नई सेवाओं को चालू करने के बाद इन्हें
लावारिस छोड़ दिया जाता है। नतीजा यह है कि मोटा पैसा फंसने के बाद यह
किसी के लिए भी फायदे की साबित नहीं होती हैं। अस्पतालाें में कभी दवाएं
खत्म हो जाती हैं तो
कभी एक्सरे की फिल्म। चिकित्सकाें व स्टाफ की लेटलतीफ ी
व प्रसव में पैसा लेने के मामले भी अक्सर सामने आते रहते हैं। न केवल जिला
अस्पताल बल्कि देहात के स्वास्थ्य केंद्राें का भी यही हाल है। इससे
मरीजाें को लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारी सेवाआें की इस बदहाली का फायदा
निजी अस्पताल उठाते हैं। वह मरीजाें की जेब पर डाका डाल रहे हैं। स्वास्थ्य
सेवाओं पर अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट-
कम डाक्टरों में जैसे-तैसे इलाज
लोहिया
अस्पताल में फर्रुखाबाद के अलावा कन्नौज, हरदोई, शाहजहांपुर व मैनपुरी के
बार्डर इलाके के मरीज भी आते हैं। यहां चिकित्सकों के 28 पद स्वीकृत हैं।
इनमें से 18 पर तैनाती है। दो चिकित्सक लंबे अवकाश पर हैं। मौजूदा ओपीडी
800 के आसपास रहती है। इनमें से 50 फीसदी मरीज नए होते हैं। अस्पतालाें में
फार्मासिस्टाें के 7 पद हैं। इनमें से 3 की ही तैनाती है।
लोहिया महिला
अस्पताल में चिकित्सकों के 11 पद हैं। इनमें से तीन खाली हैं। 8 पदों पर ही
तैनाती है। इनमें से भी दो चिकित्सक लंबे अवकाश पर हैं। लैब टेक्नीशियन के
पद पर किसी की तैनाती नहीं है। रेडियोलॅाजिस्ट व पैथोलॅाजिस्ट के पद भी
खाली हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कायमगंज में 9 पदों के सापेक्ष 4
चिकित्सक हैं। नवाबगंज में चिकित्सकाें के 7 पद खाली हैं। यहां 9 में से 7
पदों पर ही तैनाती है। सिविल अस्पताल लिंजीगंज में 7 में से 4 व फतेहगढ़
अस्पताल में 6 पदों के सापेक्ष एक पर ही तैनाती है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी डाक्टर विहीन
जिले
के 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्राें पर एमबीबीएस डाक्टर नहीं हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जगतपुर, बिल्सड़ी, पसियापुर, कुआंखेड़ा वजीर
आलम, दरौरा, पिथनापुर, गदनपुर तुर्रा, सबलपुर, अमृतपुर, सरह, अचरा खलवारा,
खिमसेपुर, पखना, देवसनी, धीरपुर में फार्मासिस्ट या आयुष चिकित्सक तैनात
हैं। इससे इन इलाकाें के मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
इन्हें इलाज के
लिए शहर आना पड़ता है। यहां भी बदइंतजामियों से सामना होने पर बस निजी
अस्पतालों का सहारा होता है। बाकी अस्पतालाें में भी डाक्टरों की कमी है।
पीएचसी राजेपुर, मोहम्मदाबाद, कमालगंज, बरौन में चिकित्सकों के 7 पद हैं।
इनमें कमालगंज में केवल 3 व बाकी जगह दो-दो चिकित्सक ही तैनात हैं।
शमसाबाद में पांच पदों पर एक ही चिकित्सक हैं।
धूल खा रहीं एनआईसीयू वार्ड की मशीनें
लोहिया
अस्पताल में रेडियंट वार्मर एंड फोटो थेरेपी (एनआईसीयू) वार्ड खुला है।
यहां भारीभरकम लागत से मशीनें खरीदी गईं। यह वार्ड नवजात बच्चाें के इलाज
के लिए था। नवजाताें को निमोनिया या पीलिया होने पर उनका इलाज वार्मराें के
जरिए होना था। स्टाफ नर्सों की कमी से यह वार्ड शुरू ही नहीं हो सका। अब
मशीनें तक खराब हो गई हैं। इससे नवजाताें को दिक्कत होने पर परिजनाें को
नर्सिंग होमाें में जेब कटानी पड़ती है।
एक्सरे हो जाए तो बड़ी बात
लोहिया
में दो एक्सरे मशीन हैं। इसके बाद भी एक्सरे हो जाए तो बड़ी बात। यह माह
में 15 दिन बमुश्किल से खुलता है। एक्सरे की जिम्मेदारी डा. योगेंद्र के
हवाले है। इनकी पोस्टमार्टम, इमरजेंसी व कोर्ट गवाही में भी ड्यूटी रहती
है। इससे 15 दिन ही एक्सरे होते हैं। लोहिया में एक्सरे मुफ्त है लेकिन
निजी पैथालॉजी 200 से 250 रुपये वसूल कर लेती हैं।
वर्जन
स्टाफ
की कमी है। मरीजाें की ज्यादा संख्या वाले अस्पतालाें में आयुष चिकित्सक
तैनात किए गए हैं। नियमित मॉनीटरिंग होती है। शिकायत सही पाए जाने पर
कार्रवाई भी की जाती है।
डा. राकेश कुमार, सीएमओ