न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खिमसेपुर भगवान भरोसे चल रहा है। चिकित्साधिकारी केवल हस्ताक्षर कर वेतन निकालने के लिए आते है। कई रोगियों ने उनका चेहरा तक नहीं देखा है। अधिकांश रोगियों का आरोप है कि उनसे इंजेक्शन का 20 रुपया वसूल किया जाता है।
जो रोगी इंजेक्शन का रुपया नहीं देते हैं। उन्हें कोई भी गोली देकर चलता कर दिया जाता है संगीता निवासी नगला तलबदार ने बताया कि उसे कई दिन से बुखार आ रहा है। 20 रुपया देकर इंजेक्शन लगवा रही है। यहां डॉक्टर कभी नहीं मिलते। कंपाउंडर ही दवा देते हैं। वह 11 बजे से पहले कभी अस्पताल नहीं पहुंचते हैं।
पेट दर्द की दवा लेने आई सोनी का कहना है कि उसके पास पैसे नहीं हैं। इस वजह से उसे इंजेक्शन न लगाकर गोलियां देकर टरका दिया जाता है। पांच दिन से पेट दर्द की दवा लेने आ रही है लेकिन उसे कोई आराम नहीं हुआ है।
दवा लेने आई मुन्नी देवी का कहना है कि उसके बेटे को कई दिन से बुखार आ रहा है। यहां 11 बजे से पहले कोई कर्मचारी नहीं मिलता। डॉक्टर का तो आज तक उसने चेहरा नहीं देखा है।
नगला तलबदार के रहने वाले सुरेंद्र का कहना है कि नाममात्र के लिए यहां सरकारी अस्पताल है। पैसे निजी अस्पताल की तरह वसूल किए जाते हैं। किसी भी रोगी को बिना पैसे के दवा नहीं दी जाती है। यदि कोई पैसा नहीं देता है तो उसे चलता कर दिया जाता है।
फार्मेसिस्ट अखिलेश यादव का कहना है कि पैसे लेने का आरोप रोगी निराधार लगा रहे हैं। सरकारी अस्पताल में सभी दवाइयां मौजूद हैं। इस वजह से पैसे लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता। जो रोगी यहां आता है। उसे दवा उपलब्ध कराई जाती है।
डॉक्टर देख रहे अन्य अस्पतालों का चार्ज
आयुष फार्मेसिस्ट अमित कुमार का कहना है कि यहां डॉक्टर नीरज यादव की तैनाती है लेकिन वह कई अन्य अस्पतालों का चार्ज भी देख रहे हैं। इस वजह से वह यहां नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। जब समय मिलता है तो वह आ जाते हैं।
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जिले में जो भी सरकारी अस्पतालों के कर्मचारी पैसे लेकर दवा देते पाए गए तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं की जाएगी। खिमसेपुर न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के खिलाफ जांच बैठा दी गई है।