नर्सिंग होम में मरीज उतारने फिर पहुंची सरकारी एंबुलेंस
फर्रुखाबाद। सरकारी एंबुलेंस नियमों को दरकिनार करके निजी नर्सिंग होम में मरीजों को उतारने जाती है। गुरुवार दिन में एक 108 एंबुलेंस मरीज को नर्सिंग होम में उतारते देखी गई।
आकस्मिक घटनाएं, बीमार अथवा प्रसूताओं को घर या घटनास्थल से लेकर सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए 108, 102 और एएलएस एंबुलेंस संचालित हैं।
इन एंबुलेंसों मेें तैनात कर्मचारी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। आवास विकास में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल स्थित है। इस सरकारी अस्पताल से लेकर मसेनी चौराहे तक बड़ी संख्या में वैध व अवैध नर्सिंग होम खुले हैं। ये नर्सिंग होम सरकारी एंबुलेंस के कर्मचारियों से सेटिंग करके मरीजों को अपने यहां उतरवा लेते हैं।
गुरुवार दोपहर एक 108 एंबुलेंस एक नर्सिंग होम के सामने पहुंची। मरीज को उतारने के लिए अस्पताल से स्ट्रेचर लाया गया और उसे उतारकर अंदर ले जाया गया।
बता दें कि 11 नवंबर की रात इसी नर्सिंग होम के सामने एक सरकारी एंबुलेंस से मरीज को उतारने का फोटो वायरल हुआ था। इससे साफ है कि इस नर्सिंग होम और एंबुलेंस कर्मचारियों की सेटिंग काफी मजबूत है।
जांच के नाम पर सिर्फ खानापूरी
13 नवंबर को अमर उजाला ने ‘निजी अस्पतालों में मरीज पहुंचाती हैं 108 एंबुलेंस’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद जांच शुरू हो गई। एंबुलेंस के स्थानीय अधिकारियों से जवाब मांगा गया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसी का नतीजा है कि एंबुलेंस के कर्मचारी मनमानी पर उतर आए हैं।
‘कोई सरकारी एंबुलेंस निजी अस्पताल में मरीज लेकर नहीं जा सकती। सिर्फ सीएमओ के अनुमोदन पर ही एंबुलेंस जा सकती है। अभी सीएमओ स्तर से किसी भी एंबुलेंस को अनुमोदन नहीं दिया गया। यदि कोई एंबुलेंस निजी अस्पताल में मरीजों को उतारती है, तो जांच के बाद कार्रवाई होगी।’ - सौरभ कुमार, प्रोग्राम मैनेजर, 108, 102 एंबुलेंस, फर्रुखाबाद।