फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ स्थित कुटरा कालोनी के आवास जर्जर होते जा रहे हैं। दीवारें गिरने लगी हैं। हैंडपंप खराब होकर ठूंठ बन गये हैं। सफाई न होने से नालियां चोक हो गईं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। इन आवासों में रहने वाले कर्मचारी जरूरत के मुताबिक मरम्मत करा लेते हैं। पीडब्ल्यूडी इन आवासों की दशा सुधारने पर ध्यान नहीं दे रहा है।
सरकारी विभागों के लिपिक स्तर के कर्मचारियों के लिए कुटरा कालोनी में करीब 140 आवास बने हैं। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। करोड़ों रुपये से बनी यह कालोनी उपेक्षा की शिकार है। कई आवास जर्जर हालत में हैं। इसके निर्माण में बालू का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया। पुलिस लाइन की ओर गिरी तीन आवासों की दीवार इसकी गवाही दे रही है। आवासों की मरम्मत के नाम पर कर्मचारियों के वेतन से 368 रुपये प्रति माह कटौती की जाती है। इसके बावजूद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता। वहीं कालोनी में लगे कई हैंडपंप खराब हैं।
बातचीत के दौरान कालोनी निवासियों ने बताया कि 15 वर्ष से पीडब्ल्यूडी ने न तो आवासों की मरम्मत कराई और न ही रंगाई-पुताई कराई। आवासों में टूट-फूट होने पर कर्मचारी अपनी लागत से ठीक कराते हैं। कालोनी में नियमित सफाई कर्मी नहीं पहुंचता। यदा-कदा पहुंच भी जाता है तो झाड़ू लगाने के बाद कूड़ा नहीं उठाता। इससे जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। कूड़े से पटी नालियां भी चोक हैं। कुछ लोगों ने दबी जुबान से कहा कि अधिकारियों के आवास चमकाए जाते हैं, जबकि कर्मचारियों की शिकायतों पर भी ध्यान नहीं दिया जाता।
जिला जज कार्यालय के प्रधान लिपिक डीपी सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूडी को रखरखाव पर ध्यान देना चाहिए। उनके आवास की आधी दीवार गिर गई, जबकि आधी, गिरने की कगार पर है। वहीं आडीटर अमर बहादुर ने बताया कि मरम्मत न होने से कई आवास जर्जर हो चुके हैं। शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं होती। रामनिवास यादव का कहना है कि कालोनी की कुटरा गांव की ओर बनी दीवार से काफी ईंटें गायब हो चुकी हैं। बची हुई आधी दीवार की भी ईंटें चोरी हो रही हैं। दीवार हटने से कालोनी में चोरी की आशंका बढ़ जाएगी। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
पानी की होती बर्बादी
कुटरा कालोनी में रह रहे डॉ. अंशुमान द्विवेदी ने बताया कि पानी की टंकी से सीधी जलापूर्ति की जाती है। वाटर लाइनें कमजोर होने से फटने का भय देख बिना जरूरत आवासों में टोटियां खोल दी जाती हैं। वहीं पाइप लाइन लीक होने से हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है। जानकारी पर पता चला कि आटोमेटिक जलापूर्ति की व्यवस्था है। इससे चार-चार घंटे लगातार पानी की सप्लाई चालू रहती है। नलकूप पर मैनुअल आपरेटर की तैनाती होनी चाहिए। जिससे पानी की बर्बादी को रोकी जा सके।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
कुटरा कालोनी की देखरेख कर रहे पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता मनोज कुमार ने बताया यदि किसी कर्मचारी को आवास में मरम्मत की जरूरत है तो अवगत कराना चाहिए। कोई आवास जर्जर नहीं है। जरूरत के अनुसार मरम्मत कराई जाती है। जिसे दिक्कत होगी वह खुद ही लिखित सूचना देगा। इसके बाद विचार किया जाएगा।