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गो सदन की भूमि पर आबाद हो गया गांव

Tue, 16 May 2017 12:02 AM IST
फर्रुखाबाद
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कटरी धर्मपुर के गो सदन में बंद भूखे बछड़े। - फोटो : amarujala
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फर्रुखाबाद। राजकीय गो सदन कटरी धर्मपुर की भूमि पर पंखियन की मढ़ैया गांव आबाद हो गया है। पांच एकड़ भूमि पर हुए अतिक्रमण के साथ ही यहां ब्लाक स्तर से शौचालय बना दिए गए हैं। गो सदन की पड़ी 1000 बीघा भूमि में 400 बीघा भूमि पर गांव के लोगों ने कब्जा कर लिया था। इसमें 100 बीघा भूमि हुकुम सिंह तथा 50 बीघा भूमि छोटेलाल ने जोत रखी थी। इन दोनों को गो सदन के पूर्व प्रबंधक पीके सक्सेना ने चपरासी दिखाकर भूमि पर कब्जा करा दिया था।
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अमर उजाला के अभियान के बाद हुए खुलासे से घबराकर हुकुम सिंह और छोटेलाल ने जमीन स्वत: छोड़ दी है। 10 बीघा खेत युसूफ ने जोत रखा था। उसने भी अब गो सदन की भूमि के पास जाने से तौबा कर ली है। गो सदन की भूमि पर ही शबीना, राखी, सद्दाम, शमसेर, गुलशेर, सत्तार, सलमान, गुड्डन, बकरीदन और हसीना समेत आधा सैकड़ा लोगों ने फूस की झोपड़ियां रखकर पंखियन की मढ़ैया गांव आबाद कर दिया है। इस गांव में रहने वाले लोगों को शौचालय भी मुहैया कराए गए हैं।

इन लोगों ने गो सदन की भूमि पर मकान आबाद करने के साथ-साथ वहां कंडे पाथकर भी अतिक्रमण किया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पुष्प कुमार का कहना है कि गो सदन की भूमि पर आबाद पंखियन की मढ़ैया में सरकार की ओर से शौचालय पशु विभाग ने नहीं, बल्कि प्रशासन ने बनवाए हैं। प्रशासन को ही उन्हें ध्वस्त कराना चाहिए। हुकुम सिंह न तो कभी राजकीय गो सदन में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत रहा और न मौजूदा समय में है। उसने 100 बीघा और उसके भाई छोटेलाल ने 50 बीघा भूमि को जोत लिया था, जो उससे वापस ले ली गई है। यह सब कारनामा सेवानिवृत्त मैनेजर पीके सक्सेना ने किया था।
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उधर पीके सक्सेना ने बताया कि एक साल पहले वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद नए मैनेजर प्रदीप श्रीवास्तव और छोटेलाल ने मिलकर इस साल 15 हजार रुपये उन लोगों से वसूल किए, जो लोग गो सदन की भूमि में गेहूं की फसल बोए थे। इस फसल को बोने वालों के विरुद्ध एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। उनसे किसके आदेश पर रुपये वसूले गए। इसका जवाब सीवीओ के पास नहीं है। कटरी धर्मपुर के लेखपाल रामलखन पांडेय का कहना है कि उन्होंने पैमाइश के दौरान पांच एकड़ भूमि पर पंखियन की मढ़ैया गांव बसा पाया है। इन सभी को तत्काल प्रभाव से गो सदन की भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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