जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से डेढ़ मीटर नीचे रह गया है। इससे गंगा किनारे रहने वाले लोग चिंतित हैं। गंगा ने दिशा भी बदल ली है। ऐसे में बाढ़ आई तो इटावा-बरेली हाईवे कटने का खतरा बढ़ गया है। इससे चार जिलों से संपर्क लगभग खत्म हो जाएगा।
गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। अमृतपुर क्षेत्र के गांव तीसराम की मड़ैया के पास से इटावा-बरेली हाईवे निकलता है। यहां पर गंगा नदी ने रास्ता बदल ली है। पहले बांध की ओर बहने वाली गंगा अब बांध छोड़ कर इटावा-बरेली हाईवे की ओर आ रही है। इससे बाढ़ आने की स्थिति में इटावा-बरेली हाईवे कटने की आशंका बढ़ गई है। ऐसा होने पर चार जिलों बरेली, हरदोई, शाहजहांपुर और बदायूं से जिले का संपर्क लगभग खत्म हो जाएगा। साथ ही कानपुर व इटावा की ओर से बरेली जाने वालों के लिए भी यह हाईवे ही मुख्य रास्ता है। इसके कटने से लोगों को करीब 50 किलोमीटर आगे कंपिल क्षेत्र के अटेना पुल होते हुए जाना होगा। इस मार्ग की चौड़ाई कम होने के कारण बड़े वाहनों को निकलने में समस्या होगी। हालांकि रविवार को गंगा का जलस्तर लगभग छह सेंटीमीटर घट गया है। रविवार को यह 135.600 मीटर दर्ज किया गया था। सोमवार को यह 135 मीटर दर्ज किया गया है। जिले में खतरे का निशान 137.60 मीटर है, जबकि चेतावनी का निशान 136.60 मीटर और लोफ्लड का चिह्न 137.10 मीटर पर है।
एसडीएम ने गंगा किनारे स्थित गांवों की रोज रिपोर्ट मांगी
गंगा और रामगंगा के किनारे बसे दस गांवों तीसराम की मड़ैया, अलाद पुर घटौली, ऊगरपुर, नगला सोता, सुंदरपुर, नगला दुर्ग, कछुआ गाड़ा, करनपुर घाट और कुढ़री सारंगपुर की अमृतपुर एसडीएम रमेश चंद्र यादव ने प्रतिदिन की रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए लेखपालों को तैनात किया गया है। उन्हें ग्रामीणों से बात कर प्रतिदिन मौके पर जाकर जायजा लेना है।