फर्रुखाबाद। ईमानदारी का राग अलापने वाले अफसर जेबें गर्म करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला सिंचाई विभाग से जुड़ा है। यहां के अफसरों ने टेंडर खोले बिना करीब 80 लाख रुपये के काम चहेते ठेकेदारों को बांट दिए। इन कामों में 30 किलोमीटर लंबा नासा नाला भी शामिल है, जिसकी सफाई के लिए 50 लाख रुपये का ठेका बिना अनुबंध दिया गया है।
एक ही परिसर में स्थित नलकूप व सिंचाई विभाग में आपसी गठजोड़ के चलते लाखों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। नलकूप विभाग से छह फर्जी कर्मचारियों का वेतन निकालकर 16 लाख 26 हजार 420 रुपये का गबन करने में कैशियर मनोज कुमार व सिंचाई विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर फैजान के खिलाफ दो दिन पहले ही मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब इन विभागों में हो रहे खेल एक के बाद एक सामने आने लगे हैं।
सिंचाई विभाग के सूत्र बताते हैं कि नाला सफाई व बाढ़ से बचाव के इंतजाम करने के लिए मई में 80 लाख रुपये के टेंडर निकाले गए थे। यह टेंडर 13 मई व 19 मई को एडीएम कार्यालय में खुलने थे। इसमें शुरू से ही खेल होने लगा। टेंडर खरीदने वाले ठेकेदारों की रजिस्टर पर एंट्री नहीं की गई। इसके साथ ही एडीएम कार्यालय में बिना टेंडर खोले चहेते ठेकेेदारों से काम शुरू करा दिया गया।
बताया जा रहा है कि 50 फीसदी से अधिक काम हो भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने अभी तक ठेकेदार के नाम अनुबंध नहीं किया है। ऐसा इसलिए है कि अगर मामला फंसता है तो अधिकारी खुद को बचा सकें। राजेपुर क्षेत्र में गंगा से लेकर रामगंगा तक करीब 30 किलोमीटर लंबे नासा नाला की 50 लाख से सफाई कराई जा रही है। करीब 70 फीसदी काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
टेंडर और अनुबंध की उन्हें जानकारी नहीं: एई
सिंचाई विभाग के राजेपुर क्षेत्र के सहायक अभियंता सूर्य प्रसाद ने बताया कि नासा नाला की सफाई सहित सभी काम अधिशासी अभियंता करा रहे हैं। टेंडर व अनुबंध की जानकारी भी अधिशासी अभियंता को ही होगी। ठेकेदार ने उन्हें कोई अनुबंध नहीं दिखाया। नासा नाला की सफाई का कार्य चल रहा है। अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार को कई बार फोन किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। पटल प्रभारी लिपिक भी कुछ कहने से कतरा रहे हैं।
उनके कार्यालय में नहीं खुला टेंडर: एडीएम
एडीएम सुभाष चंद्र प्रजापति ने बताया कि सिंचाई विभाग का कोई भी टेंडर उनके कार्यालय में नहीं खोला गया और न ही उन्हें जानकारी है। टेंडर खोलने के लिए जिलाधिकारी की ओर से अधिकारी नामित किया जाता है।
कराई जाएगी जांच, होगी कार्रवाई: डीएम
जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि उनसे टेंडर का कोई अनुमोदन नहीं लिया गया। यदि बिना टेंडर खोले ही नालों की सफाई कराई जा रही है तो यह गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया गया उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।