ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं पर मोटी रकम खर्च की गई है। इसके बाद भी आबादी का
बड़े हिस्से का गला प्यास से चटक रहा है। चार पेयजल परियोजनाएं अरसे से ठप
हैं। इनकी मरम्मत का जिम्मा ग्राम पंचायताें के पास है। वह इसमें दिलचस्पी
नहीं ले रही हैं। फलस्वरूप यहां के लोगों को पेयजल संकट का सामना करना
पड़ रहा है।
शेराखार गौटिया के ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति नहीं हो
रही है। यहां पाइप लाइन में लीकेज है। इससे पानी घरों में नहीं पहुंचता
था। अब यह परियोजना बंद है। यही हाल राजेपुर रठौरी परियोजना का है। यहां भी
पाइपलाइन लीकेज की समस्या है। यहां भी पानी घरों में पहुंचने के बजाय
गलियों में बह जाता था। यह परियोजना भी ठप है। अमृतपुर में तकनीकी खामी के
चलते परियोजना बंद है। कुम्हरौर में मोटर खराब है। इन गांवों में कई
हैंडपंप खराब हैं। इससे भी पानी
का संकट गहराया है। जिले में इस समय 49
पेयजल परियोजनाएं चालू हैं। इनमें से 14 परियोजनाएं ग्राम पंचायतों को
हैंडओवर नहीं हुई हैं। 22 पेयजल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। एक परियोजना
की लागत 80 लाख से ऊपर है। इसका काम जल निगम के हवाले है। आए दिन खराबी से
कोई न कोई परियोजना ठप हो जाती है। ग्राम पंचायतें इन्हें दुरुस्त कराने
में दिलचस्पी नहीं लेती हैं। इससे लोगों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ता
है।
परियोजनाओं में ये हैं इंतजाम
परियोजना के तहत
ओवरहेड टैंक बनाने के साथ ही नलकूप भी लगाया गया है। पेयजल आपूर्ति के लिए
गांव में लाइन बिछाई गई है। पंचायत ने एक-एक आपरेटर की तैनाती की है।
गृहस्वामियों से आपूर्ति का यूजर चार्ज लिया जाना है। इसे ग्राम पंचायत को
ही तय करना है। इसी से मरम्मत के काम भी होने हैं। कई ग्राम पंचायतें यूजर
चार्ज नहीं वसूल रही हैं। इससे मरम्मत नहीं हो पाती है।
ठप हैं यह परियोजनाएं
शेराखार गौटिया पेयजल परियोजना
क्षमता: 150 किलोलीटर
लक्षित आबादी: 2500
अमृतपुर पेयजल परियोजना
क्षमता: 100 किलोलीटर
लक्षित आबादी: 4500
राजेपुर रठौरी पेयजल परियोजना
क्षमता: 500 किलोलीटर
लक्षित आबादी: 4000
कुम्हरौर पेयजल परियोजना
क्षमता: 250 किलोलीटर
लक्षित आबादी: 3000