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Farrukhabad News: बाढ़ से बचाने की चार करोड़ की परियोजना पानी में

Thu, 09 Oct 2025 12:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो -04,,रामगंगा में परियोजना डूबने के बाद जारी कटान।संवाद
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फर्रुखाबाद। रामगंगा की बाढ़ रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने चार करोड़ रुपये से परकोपाइन का निर्माण कराया। लेकिन पहली ही बाढ़ में परियोजना रामगंगा में बह गई। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने अधूरा काम कराया, इसलिए कटान जारी है।
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राजेपुर ब्लॉक के ग्रामीणों को हर वर्ष बाढ़ से जूझना पड़ता है। हालांकि बचाव के इंतजामों पर सिंचाई विभाग हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। इस वर्ष रामगंगा की बाढ़ और कटान रोकने के लिए 29 मार्च को गांव कोलासोता में चार करोड़ पांच लाख रुपये से परकोपाइन बनाने की योजना को स्वीकृति मिली।



15 जून तक काम पूरा करने के आदेश दिए गए थे। 1200 मीटर लंबी इस परियोजना में धार रोकने के लिए परकोपाइन लगाने के साथ ही रामगंगा के किनारे बालू भरी बोरियां लगाई गईं।
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यह परियोजना ग्रामीणों के काम नहीं आई और हजारों बीघा खेत पहली बाढ़ में ही बह गए। अब भी कटान जारी है, ऐसे में मौके पर एक भी परकोपाइन दिखाई नहीं दे रहा है। हालात यह है कि करीब 400 मीटर की दूरी में बोरियां गायब होने के साथ काफी दूर तक खेत भी कट चुके हैं।







ग्रामीण बोले-घटिया काम किया, हो गया बंदरबांट



गांव कोलासोता निवासी सिंचाई विभाग के बाढ़ राहत कार्य से असंतुष्ट हैं। गांव के अमित सिंह, ललित सिंह, राजकुमार सिंह, श्यामवीर सिंह, मुन्नू सिंह कुशवाहा आदि ने विभाग पर कई आरोप लगाए। कहा कि देर से काम शुरू कराया गया। रामगंगा की तेज धार में लगे परकोपाइन में झाड़-झंखाड़ भी नहीं भरी गई। किनारे पर बिना आधार के ही बालू भरी बोरियां लगाई गईं।
बोरी के नीचे जाल भी नहीं बिछाया गया। इसी बीच रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया, इससे अधूरा काम ही छोड़ दिया गया। अमित सिंह ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने बोरियां लगाने से ज्यादा ग्रामीणों के हाथों बेच दीं। यदि मानक के अनुसार काम कराया जाता तो कटान से उनके खेत बहने से बच जाते।
लोगों ने आरोप लगाया कि चार करोड़ की परियोजना में काम कम और बंदरबांट अधिक हुआ। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तीन वर्ष पहले लगाए गए परकोपाइन आज भी मौजूद हैं, जबकि इस वर्ष कराया गया काम धार में ही समा गया।







कोलासोता में समय से काम पूरा कर लिया गया था। मल्टी लेयर में बोरियां लगाई थीं और परकोपाइन का काम भी गुणवत्तापूर्ण कराया गया। इन दिनों जलस्तर अधिक होने से परकोपाइन डूबे हुए हैं। हालांकि परियोजना में नुकसान हुआ है। जलस्तर घटने के बाद भी परियोजना की क्षति का आकलन किया जा सकेगा। इसके बाद मजबूती से काम कराया जाएगा।
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-विवेक गुप्ता, सहायक अभियंता सिंचाई
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