फर्रुखाबाद। उरई ही नहीं जिला जेल की चाक चौबंद व्यवस्था को धता बता कर कई बंदी फरार हो चुके हैं। यहां 1165 बंदियों की सुरक्षा का जिम्मा 41 बंदी रक्षकों के हवाले है। इसके चलते बंदी दुस्साहस करते हैं। एक बंदी दीवार फांद कर भाग चुका है। फोर्स की कमी को लेकर अधीक्षक कई बार जेल अफसरों को चिट्ठी भेज चुके हैं, बावजूद अभी भी हाल वही है।
जिला जेल से थाना कंपिल के गांव अकराबाद निवासी सुभाष शर्मा आठ फरवरी 2014 को फरार हो गया था। इसके बाद इसी जेल से थाना राजेपुर के गांव मोहद्दीनपुर निवासी ओमवीर सिंह दीवार से रस्सी के जरिए फरार हो गया था। हालांकि पुलिस ने इन बंदियों को पकड़ लिया था। जिला जेल में स्टाफ की कमी है। बंदियों की तादाद क्षमता से अधिक है। यहां 846 बंदियों की क्षमता है, बावजूद इस समय 1165 बंदी हैं।
सेंट्रल जेल की सुरक्षा में भी छेद है। यहां जेल की क्षमता 1610 बंदियों की है, बावजूद 2182 बंदी हैं। 16 अप्रैल 2012 में कैदी रावसिंह पाल निवासी मुरीदपुर अकबरपुर जिला कानपुर देहात ने जेल से भागने का प्रयास किया था। उसे दबोच लिया गया था।
जिला जेल में छह डिप्टी जेलर केे पद हैं। इस समय तीन डिप्टी जेलर की ही तैनाती है। 70 बंदी रक्षकों के मानक के विपरीत 41 बंदी रक्षक तैनात हैं। 10 बंदी रक्षक बंदियों की सुरक्षा के लिए अस्पताल या फिर पेशी पर बने रहते हैं। उरई की घटना के बाद जिला जेल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए है। बंदियों की निगरानी से लेकर उनकी मुलाकात करने के लिए आने वालों पर जेल प्रशासन नजर रखे हुए है।
जिला जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि जेल में क्षमता से अधिक बंदी हैं। स्टाफ की काफी कमी है। इसको लेकर शासन को पत्र भेजा जा चुका है।