अमृतपुर। गंगा के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी किसानों की खरीफ फसलों को भारी नुकसान पहुंचा चुका है। खेतों में बोई गई धान, उड़द, मूंग, तिल और बाजरा की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। करीब 2200 हेक्टेयर गन्ना की फसल भी बाढ़ का पानी भरा रहने से चौपट होने के कगार पर पहुंच गई है।
तहसील क्षेत्र में करीब तीन हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल बोई गई है। गंगा में आई बाढ़ से 2200 हेक्टेयर फसल में लंबे समय से पानी भरा है। किसानों का कहना है कि पानी खेतों से निकलने में काफी समय लगेगा। लगातार पानी भरा रहने से गन्ने के पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। रूपापुर चीनी मिल के एक अधिकारी ने बताया कि गन्ने के खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से इसका सीधा असर गन्ने के किल्ले पर पड़ेगा। पानी जल्द न निकलने पर उत्पादन में काफी गिरावट आएगी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि गन्ने की फसल की कुछ समय तक पानी सहन करने की क्षमता होती है लेकिन खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहने से जड़ों के आसपास हवा का संचार बंद हो जाता है। इससे जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और पौधों की बढ़वार रुकने लगती है। लंबे समय तक जलभराव रहने पर जड़ें कमजोर होने के साथ सड़ने लगती हैं। पौधे पीले पड़ सकते हैं और गन्ने की मोटाई व वजन कम होगा। 30 से 40 प्रतिशत की पैदावार कम होने की संभावना होती है।