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Farrukhabad News: गंगापार के गांवों में बाढ़ से फैली बीमारी, झोलाछाप के भरोसे ग्रामीण

Wed, 10 Sep 2025 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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फोटो-09, शाहजहांपुर-शमशाबाद मुख्य मार्ग पर चौराहार गांव के सामने बैलगाड़ी पर रखकर बाइकों को ले
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अमृतपुर। गंगा और रामगंगा की बाढ़ से घिरे गंगापार के गांवों में बीमारी फैलनी शुरू हो गई है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक स्वास्थ्य सेवाएं जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाई हैं।
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बाढ़ से प्रभावित दो गांवों में लोग बीमार हो रहे हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं।
मंगलवार को सीएचसी राजेपुर प्रभारी डॉ. प्रमित राजपूत ने छह सदस्यीय स्वास्थ्य टीम को दवा वितरण के लिए जमापुर तक भेजा, मगर मोटरबोट न मिलने के कारण टीम को लौटना पड़ा। हरसिंहपुर कायस्थ व ऊगरपुर गांवों में न तो स्वास्थ्य टीम पहुंची और न ही प्रशासनिक अधिकारी।
बीमारी से जूझ रहे ग्रामीण झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
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गांवों में बुखार, जुकाम, खुजली और दस्त जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। डॉ. राजपूत ने लेखपाल से मोटरबोट की व्यवस्था कराने को कहा था, लेकिन काफी इंतजार के बाद भी कोई प्रबंध नहीं हुआ। बताया गया कि क्षेत्रीय विधायक बाढ़ क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, इसलिए मोटरबोट आज उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
प्रभारी ने स्वीकार किया कि बाढ़ का पानी अधिक होने से टीम गांवों तक नहीं पहुंच पा रही। लिहाजा गंगापार के हरसिंहपुर कायस्थ और ऊगरपुर गांव में एक माह बीत जाने के बाद भी कोई स्वास्थ्य टीम नहीं जा सकी।
गांवों में कटान शुरू
शमसाबाद। गंगा की तेज धार से शमसाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में कटान शुरू हो गया है। कटान की चपेट में आकर एक पक्का मकान और एक झोपड़ी नदी में समा गई, जबकि कई अन्य मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। कटान शुरू होते ही गांव में दहशत फैल गई और ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी करने लगे।
गांव समैचीपुर निवासी छंगे का पक्का मकान गंगा में समा गया, वहीं जारिफ की झोपड़ी भी नदी की धार में कट गई। तेज बहाव से कई अन्य मकान भी खतरे में हैं। ग्रामीण अपने-अपने घरों को तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की तैयारी करने लगे हैं।
ग्राम प्रधान तारा बानो ने बताया कि गंगा के कटान से दो ग्रामीणों के मकान व झोपड़ी नदी में समा गई है। इसके अलावा इरशाद, सुनील और मतलूब के मकान गंगा की धार से कुछ ही दूर हैं।
वहीं गांव के सानू मियां की जमीन लगातार कटान की चपेट में आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटान की रफ्तार यही रही तो आने वाले दिनों में कई और घर और जमीनें गंगा की धारा में समा सकती हैं।
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