फर्रुखाबाद। पतित पावनी गंगा में सीवेज के पांच नाले शहर के गंदे पानी को बहा रहे हैं। नालों के पानी को साफ करने के लिए 252 करोड़ रुपये से बन रहे दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) अभी चालू नहीं हो सके हैं। दोनों प्लांटों की 47.7 एमएलडी पानी रोजाना शोधन करने की क्षमता है।
एसटीपी के चालू हो जाने के बाद गंगा में प्रदूषित पानी नहीं गिरेगा। कार्यदायी संस्था का दावा है कि 10 दिन में एसटीपी को चालू कर दिया जाएगा। इसके बाद तीन माह तक ट्रायल चलेगा। संस्था इसे 15 साल तक संचालित करेगी।
फर्रुखाबाद के पांच नालों में अंगूरीबाग होकर भैरोघाट, धीमरपुरा नाले गंगा में गिर रहे हैं। इसके अलावा हैवतपुुर गढि़या कांशीराम कॉलोनी, भीकमपुरा होकर बीबीगंज नाला वन क्षेत्र में जाते हैं। रेलवे स्टेशन से एक नाला ढिलावल की ओर चला जाता है। इसी तरह फतेहगढ़ में तीन नालों में रानी घाट, बरगदियाघाट और नौखंडा नाला गंगा में गिरते हैं। पांच बड़े और सोताबहादुरपुर के कई छोटे नाले गंगा में प्रदूषित पानी गिरा रहे हैं। इन नालों के सीवेज पानी को साफ करने के लिए सरकार ने तीन साल पहले गंगा से सटे गांव अमेठी कोहना में 30 एमएलडी और फतेहगढ़ में 17.7 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी शोधन की क्षमता वाला 252.41 करोड़ रुपये से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने का काम शुरू किया।