फर्रुखाबाद। लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान संक्रमीणय घोषित की गई जमीन का नामांतरण निरस्त करने के लिए ग्रामसभा गांधी के नामित अधिवक्ता ने तहसीलदार अमृतपुर न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया है। तहसीलदार ने प्रार्थनापत्र स्वीकार करते हुए संबंधित फाइल तलब की है।
गांव गांधी निवासी रामपाल ने पट्टे पर आवंटित असंक्रमणीय भूमि को बिना अनुमति के 26 दिसंबर 2012 को भोलेपुर पीतम नगला निवासी अनुराग सिंह को बेच दिया था। विवादों के चलते यह संक्रमणीय घोषित नहीं हो सकी थी। इस बीच लिंक एक्सप्रेसवे में भूमि आने से इसका बैनामा कराने से पहले एसडीएम ने इसे संक्रमणीय घोषित कर दिया। तहसीलदार ने इसका नामांतरण भी कर दिया। साथ ही लिंक एक्सप्रेसवे के लिए यूपीडा के पक्ष में अनुराग सिंह से बैनामा करा लिया। यह खबर अमर उजाला में 27 जुलाई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद तहसील के अधिकारियों में खलबली मच गई।
लेखपाल सावन कुमार ने सोमवार को तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया। अपर आयुक्त न्यायालय से पट्टा निरस्त होने के बाद गलती से नामांतरण होने का इसमें उल्लेख किया है। तहसीलदार ने प्रार्थनापत्र ग्रामसभा के नामित अधिवक्ता यशवीर सिंह को दे दिया। अधिवक्ता ने नामांतरण निरस्त करने के लिए तहसीलदार न्यायालय में प्रार्थना पत्र पेश किया। तहसीलदार शशांक सिंह ने बताया कि यदि कुछ गलत हुआ है तो सुधार किया जाएगा। गलती किसी से भी हो सकती है। गाटा संख्या 352 की वर्तमान खतौनी कंप्यूटर से न निकालना लिपिकीय त्रुटि हो सकती है। उसे सही कर दिया जाएगा।