फर्रुखाबाद/कमालगंज। फर्रुखाबादी आलू का प्रमुख बाजार रहे ओडिशा व झारखंड में बंगाल की आलू का कब्जा है। इसके चलते इन राज्यों के लिए लोडिंग बिल्कुल बंद है। वहीं, दक्षिण के राज्यों में कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र व आंध्रप्रदेश में आगरा बेल्ट के आलू की धमक है। ऐसे में बाहर की मंडियों में फर्रुखाबादी आलू की मांग बहुत सीमित रह गई है। आलू का भाव भी रिकार्ड मंदी की गिरफ्त में है। शीतगृहों में अब भी 70 प्रतिशत आलू भरा है।
नई फसल के आलू की बोआई इसी माह शुरू हो जाएगी लेकिन जो आलू शीतगृहों में भरा है, उसकी निकासी व बिक्री को लेकर किसान, व्यापारी और शीतगृह संचालक चिंता में हैं। फर्रुखाबाद का आलू बड़े पैमाने पर असम के अलावा ओडिशा, झारखंड व बिहार भेजा जाता था। लेकिन बंगाल में हुई आलू की बंपर पैदावार ने समीकरण बदल दिए। बंगाल का आलू इतनी अधिक मात्रा में ओडिशा पहुंच रहा है कि फर्रुखाबाद के आलू की कोई गुंजाइश नहीं बची। बंगाल का आलू झारखंड भी प्रचुर मात्रा में जा रहा है।
बंगाल से ओडिशा का भाड़ा 130, फर्रुखाबाद से 400 रुपये क्विंटल
- कमालगंज के आलू व्यापारी मोहम्मद अफसीर का कहना है कि पिछले सालों में ओडिशा के भुवनेश्वर, कटक, ब्रह्मपुर सहित कई जिलों में फर्रुखाबाद का सफेद आलू ख्याती व पुखराज जाता था। इस बार वहां फर्रुखाबाद के बजाय बंगाल का आलू सस्ता पड़ने से जा रहा है।
महमदपुर अचला निवासी इशरार बताते हैं कि बंगाल से ओडिशा माल जाने पर 120 से 130 रुपये क्विंटल भाड़ा है। जबकि अधिक दूरी के कारण फर्रुखाबाद से आलू भेजे जाने पर 400 रुपये क्विंटल खर्च होता है। ओडिशा में बंगाल का आलू 700 रुपये क्विंटल बिक रहा है। इसलिए ज्यादा भाड़ा खर्च से यहां के आलू का परता नहीं पड़ रहा। झारखंड भी इसी कारण से आलू नहीं जा पा रहा।
बिहार में भोजपुर, गया, पटना तक यहां का आलू जा रहा है। जबकि, पटना के आगे भी बंगाल का माल पहुंच रहा है। वहीं, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि में अच्छी गुणवत्ता के चलते आगरा बेल्ट का आलू पसंद किया जा रहा। यहां के आलू की यूपी के अलावा असम के सिलचर, गुवाहाटी आदि के लिए ही लोडिंग हो पा रही है।
उन्नतिशील किसान शरद कुमार का कहना है कि यहां के किसानों को आगरा की तरह अच्छा आलू पैदा करने के साथ ही छंटाई करके बाहर भेजने लायक अच्छे आलू की अलग से लाट बनाकर भंडारित करना चाहिए।
चिप्सोना के 100 रुपये क्विंटल भाव टूटे
- अभी तक चिप्सोना आलू 50 किलो का पैकेट औसतन 500 रुपये तक बिक रहा था लेकिन चार-पांच दिन में भाव घटकर 350 से 410 रुपये पैकेट तक आ गए। सोमवार को नेपाल भेजने के लिए सबसे अच्छा चिप्सोना 411 रुपये पैकेट बिका। सफेद आलू लुढ़क कर 120 से 170 रुपये पैकेट रह गया। इसके भाव बस शीतगृह भाड़ा चुकता करने भर के लिए ही मिल पा रहे।
9.72 लाख में से 6.79 लाख मीट्रिक टन अब भी शीतगृहों में
- जिले के 121 शीतगृहों में भंडारित 9.72 लाख मीट्रिक टन आलू में से साढ़े छह माह में 2.93 लाख मीट्रिक टन की ही निकासी हुई है। अब भी 6.79 लाख एमटी आलू भरा है। जबकि आठ-दस दिन में नई अगेती फसल की बोआई का समय आ जाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि ओडिशा में बंगाल का आलू सस्ता पड़ रहा है। पिछले दो दिन में निकासी बढ़कर 32 से 35 प्रतिशत पहुंच गई है। आलू की बोआई शुरू होने के साथ निकासी बढ़ने का समय आ गया है। भाड़ा अनुदान के लिए किसान पोर्टल पर पंजीकरण कराएं।