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फर्रुखाबादः थानों पर सुनवाई नहीं, अधिकारी दे रहे जांच का ‘टॉनिक’

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फर्रुखाबाद।
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हाल ही में विकास दुबे प्रकरण में सामने आए बदमाश और पुलिस के गठजोड़ ने सबको हैरान कर दिया है। इस ‘गठजोड़’ के कारण ही अपराधियों के हौसले बढ़ गए वहीं पुलिस शह देती रही। ऐसे नहीं है कि विकास दुबे की शिकायत नहीं की गई थी। लेकिन उन्हें दबा दिया गया। जिलेे के एसपी के पास भी पुलिस की कई शिकायतें आई हैं, जहां पुलिस पर दबंगों का साथ देने या खुद दबंगई करने का आरोप है, लेकिन इन शिकायतों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अपनों की जांच में पुलिस अक्सर अपनी आंखें बंद कर लेती है।
केस- 1
मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव रोहिला के मजरा निवासी अनुपम ने 8 जून को एसपी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि अवैध शराब व खनन का काम करने वाले दबंग ने कोतवाली के एक चर्चित सिपाही के साथ मिलकर मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। एसपी ने कोतवाल को जांच करने के आदेश दिए। पुलिस ने पीड़ित को ही फटकार लगाकर सिपाही को क्लीन चिट दे दी।
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केस -2
नवाबगंज थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण ने 15 जून को एसपी को प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाई थी कि उसने नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म के आरोप में थाने में तहरीर दी थी। पुलिस ने छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज किया। मुकदमे की विवेचना दरोगा आशू कुमार कर रहे हैं। पुत्री के कोर्ट में बयान हो चुके हैं, उसमें पुत्री ने दुष्कर्म होने का बयान दिया है। लेकिन दरोगा दूसरी पार्टी से मिलकर मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं बढ़ा रहे हैं। इस मामले में 8 जून को भी प्रार्थना पत्र दिया था। एसपी ने सीओ मोहम्मदाबाद को जांच करने के आदेश दिए थे। दोबारा आई शिकायत भी सीओ को सौंप दी।
केस - 3
मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव माडल शंकरपुर निवासी अर्जुन जाटव ने 16 जून को एसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि हल्के के दरोगा आए दिन उसको परेशान करते हैं। एक दिन उनके बालों की कटिंग देर से करने पर पहुंचा तो उन्होंने काफी भला बुरा कहा। 15 जून को दरोगा दुकान पर आए और उसकी बाइक के कागज मांगे और चालान करने के बाद कागज भी अपने साथ लेकर चले गए थे। एसपी ने सीओ मोहम्मदाबाद को जांच करने के आदेश दिए थे। जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
मैं प्रतिदिन फरियादियों की समस्या की सुनवाई अपने कार्यालय में करता हूं। सभी मामलों में जांच के आदेश दिए जाते हैं। जांच में शिकायत सही होने पर कार्रवाई होती है। फरियादियों की शिकायतों के आधार पर संबंधित थानेदार की कार्य प्रणाली का पता लगाकर उसको चेतावनी भी देते हैं।
डॉ. अनिल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद
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