फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल का खाना यानी मर्ज को बढ़ाना

विज्ञापन
लोहिया अस्पताल में हाथ में रोटी लेती महिला। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल का खाना मरीजों का मर्ज और बढ़ा रहा है। यहां भर्ती मरीज को बीमारी कुछ भी हो खाना एक जैसा ही मिल रहा है। इस ओर न तो डॉक्टर ध्यान दे रहे हैं और न ही खाना उपलब्ध कराने वाले जिम्मेदार ही गंभीर हैं। हालत यह है कि रोटियां तीमारदार के हाथ में थमा दी जाती हैं।
विज्ञापन

वैसे तो हर मरीज का भोजन उसकी बीमारी के हिसाब से होना चाहिए। डॉक्टर भी इसकी सलाह देते हैं। लेकिन लोहिया अस्पताल में ऐसा नहीं है। लोहिया अस्पताल में भर्ती उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी, दमा, टीबी के मरीजों को भोजन और नाश्ता एक सा ही दिया जा रहा है।
डॉक्टर मरीज की डायट लिखने की जरूरत नहीं समझते। लिहाजा रसोई के मेन्यू के हिसाब से बनने वाला भोजन ही मरीज के पास तक पहुंचता है। कई बार मेन्यू को भी ताख पर रख दिया जाता है। जिम्मेदार अपनी सहूलियत के हिसाब से भोजन मुहैया करा देते हैं।
विज्ञापन

गुरुवार को अस्पताल में 58 मरीज भर्ती थे। इन मरीजों के लिए दोपहर के खाने में अरहर की दाल व तोरई-आलू की सब्जी बनी थी। जबकि मेन्यू में गोभी की सब्जी थी। इसी तरह रात के खाने में मूंग की दाल, आलू तोरई की सब्जी थी। जबकि मेन्यू के हिसाब से आलू टमाटर की होनी चाहिए। फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक, खांसी, जुकाम के मरीज को मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए।
इसी तरह अगर सांस और दमा का रोगी है तो उसे ठंडी चीजों की मनाही होती है। ऐसे में उसे तोरई नहीं खानी चाहिए, लेकिन अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को जो खाना उपलब्ध कराया गया, उसे खाना उनकी मजबूरी है। इस समस्या के पीछे डायट चार्ट का न होना भी है। अगर डॉक्टर हर मरीज का डायट चार्ट दे दें तो खाना उसी हिसाब से उपलब्ध कराया जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
अस्पताल में खाना बांटने में भी अव्यवस्थाएं हावी हैं। तीमारदारों को वार्ड के बाहर अपने बर्तन लाने पड़ते हैं। उसमें सब्जी और दाल दी जाती। तीमारदारों को सिल्वर पेपर में लपेटकर देने के बजाय रोटियां हाथ में थमा दी जाती हैं। कई बार हवा लगने से रोटी सूख जाने से बुजुर्ग मरीजों को खाने में दिक्कत होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें