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लेखाकार अंजान, हो गया डेढ़ करोड़ का भुगतान

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फर्रुखाबाद। राजकीय नलकूप विभाग में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। बिल वाउचरों पर लेखाकार के हस्ताक्षर कराए बिना करीब डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया गया। लेखाकार से हस्ताक्षर कराना तो दूर की बात, जानकारी तक नहीं दी गई। वित्तीय वर्ष का बजट खर्च करने के चक्कर में भुगतान प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
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जनपद में 315 राजकीय नलकूप हैं। प्रति नलकूप के रखरखाव के लिए 38 हजार रुपये का बजट प्रति वर्ष शासन से मिलता था। अब इसे बढ़ाकर 58 हजार रुपये कर दिया गया है। हालांकि बढ़ी दर से भुगतान नये वित्तीय वर्ष से होने की बात कही जा रही है।
नलकूपों की मरम्मत, नव निर्माण आदि काम के टेंडर व वर्कऑर्डर के माध्यम से कराए जाते हैं। खेल के चलते टेंडर से बचने के लिए लाखों के कार्य टुकड़ों में बांटकर वर्क ऑर्डर से करा दिए गए।
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फर्जी भुगतान के लिए चहेते ठेकेदारों के नाम वर्क ऑर्डर बनाए गए। फिलहाल कार्य कितनी भी लागत का हो केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त लेखाकार के हस्ताक्षर के बाद ही भुगतान करने का प्राविधान है। लेखाकार ने एक-दो बार आपत्ति लगाई तो जिम्मेदार निराकरण की बजाय लेखाकार को दरकिनार कर भुगतान करने लगे।
लेखाकार अंबरीश यादव ने बताया कि उन्होंने पूर्व में कुछ बिल, वाउचरों पर आपत्ति लगाकर कागज मांगे थे। उन बिल, वाउचरों को ही वापस लेकर सीधे भुगतान कर दिया गया था। इसके बाद बिल, वाउचरों पर हस्ताक्षर कराना तो दूर उनके सामने ही नहीं लाए जाते। इससे उन्हें विभाग में भुगतान की जानकारी नहीं है।
कैशियर मनोज कुमार ने बताया कि कुल एक करोड़ 70 लाख के बिल, वाउचर भुगतान के लिए आ चुके हैं। इनमें करीब डेढ़ करोड़ का वह भुगतान कर चुके हैं, शेष की प्रक्रिया चल रही है। जब अधिशासी अभियंता का आदेश है तो लेखाकार के हस्ताक्षर की उन्हें जरूरत नहीं है।
अधिशासी अभियंता अनिल सिंह ने बताया कि हस्ताक्षर करना लेखाकार की जिम्मेदारी है। यदि वह हस्ताक्षर नहीं करेंगे तो क्या सरकारी काम रोक दिया जाएगा। इसीलिए वह लेखाकार के बिना हस्ताक्षर के ही सीधे भुगतान करा रहे हैं।
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