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परीक्षा के बदले पैटर्न ने बढ़ाई चिंता, सरल प्रश्नपत्र ने दूर की

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हर के बद्रीविशाल डिग्री कॉलेज में परीक्षा देते परीक्षार्थी। संवाद - फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद/कमालगंज। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर ने अंतिम महीने में बीएड द्वितीय वर्ष की परीक्षा का पैटर्न बदल दिया। प्रश्नपत्र सब्जेक्टिव की जगह आब्जेक्टिव होगा, इसकी चिंता छात्र-छात्राओं को सताने लगी, लेकिन शुक्रवार को जब प्रश्नपत्र हाथ में आया तो सारा तनाव दूर हो गया।
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सरल प्रश्नपत्र देखकर परीक्षार्थियों के चेहरे खिल गए। छह केंद्रों पर हुई परीक्षा के पहले दिन 1728 परीक्षार्थी उपस्थित रहे जबकि 197 ने परीक्षा छोड़ दी।
बीएड द्वितीय वर्ष की परीक्षा अभी तक सब्जेक्टिव (आत्मनिष्ठ) होती थी। कॉलेजों में पढ़ाई भी इसी आधार पर कराई गई। परीक्षा से करीब एक माह पहले विश्वविद्यालय ने आब्जेक्टिव (वस्तुनिष्ठ) परीक्षा कराने का निर्णय लिया।
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इसकी जानकारी छात्र-छात्राओं को हुई तो वह चिंतित हो गए। शुक्रवार को ‘भारत में शैक्षिक प्रणाली का विकास व चुनौतियां’ शीर्षक वाले प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा देकर जब परीक्षार्थी केंद्र से बाहर निकले तो सरल पेपर आने की खुशियां उनके चेहरे पर साफ झलक रही थीं। उन्होंने बताया कि सरल पेपर आने से वस्तुनिष्ठ पेपर को लेकर जो चिंताएं थीं वह दूर हो गईं।
छात्रा गौरी कुशवाहा ने कहा कि वैदिक काल, बौद्ध काल व मध्यकालीन शिक्षा से जुड़े सभी प्रश्न सरल थे। सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, वर्धा शिक्षा योजना आदि के प्रश्न भी आसान रहे। छात्रा तृप्ति ने बताया कि परीक्षा से एक माह पहले ही पता चला कि पेपर आब्जेक्टिव होगा, इसलिए चिंता थी।
शिक्षा पर बने आयोगों व समितियों पर काफी प्रश्न आए। जिन छात्रों ने गहनता के साथ पढ़ाई की उनके लिए पेपर बहुत अच्छा आया। कई छात्रों के 65 से 70 प्रश्न सही हो गए। 90 मिनट में कुल 100 प्रश्नों में 75 हल करने थे।
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