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फर्रुखाबाद डिपो को प्रतिदिन हो रहा लाखों का घाटा

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दो चालकों का नियम आने के बाद से फर्रुखाबाद डिपो की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अभी के हालात में फर्रुखाबाद डिपो को करीब पांच लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से घाटा हो रहा है। इतना ही नहीं 20 से 25 बसें कार्यशाला में ही खड़ी हैं। इनके लिए चालक ही नहीं मिल रहे हैं। इससे सवारियों को भी परेशानी हो रही है।
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लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर पिछले माह हुए हादसे के बाद परिवहन निगम में सभी लंबे मार्गों की बसों में दो चालकों को भेजने के आदेश दिए थे। इसके चलते फर्रुखाबाद डिपो को प्रतिदिन पांच लाख रुपये का घाटा हो रहा है। दरअसल फर्रुखाबाद डिपो में इस समय 99 बसें हैं। इसमें से 92 बसें परिवहन निगम की है जबकि सात बसें अनुबंधित हैं।
इनके लिए 186 चालक ही हैं। यह बसों की तुलना में काफी कम हैं। दरअसल फर्रुखाबाद से सबसे ज्यादा सवारियां दिल्ली की ही निकलती हैं। इसी के चलते सबसे ज्यादा बसें दिल्ली रूट पर ही चलती थीं। प्रतिदिन 40 से 48 बसें इसी रूट पर चलती थीं। दो चालकों का नियम आने के बाद से इसमें समस्या हो गई है।
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अब यदि इस रूट पर 40 बसें चलाई जाएंगी तो महज दिल्ली रूट के लिए ही डिपो को करीब 160 चालकों की जरूरत होगी। ऐसे में अन्य रूट के लिए चालक कहां से आएंगे। इसी के चलते अब दिल्ली रूट पर फर्रुखाबाद डिपो से 20 से 25 बसें ही जा रही हैं।
इतनी ही बसें रोड पर चल नहीं पा रही है। इससे परिवहन निगम को करीब पांच लाख रुपये प्रतिदिन का घाटा हो रहा है। एआरएम अंकुर विकास ने बताया कि डिपो में चालकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्दी विभाग पटरी पर लौट आएगा। फिलहाल डिपो को घाटा हो रहा है।
दिल्ली रूट की बसें कम होने से यात्रियों को भी परेशानी हो रही है। अभी तक बस स्टैंड जाने पर लगभग हर समय दिल्ली जाने वाली कोई ना कोई बस खड़ी ही मिलती थी लेकिन अभी के हालात में यह यात्रियों को काफी देर बस का इंतजार करना पड़ता है।
फर्रुखाबाद के व्यापारियों व अन्य लोगों के लिए कच्चा माल आदि लाने के लिए दिल्ली ही मुख्य सहारा है। इसमें दिल्ली जाने के लिए बसें ही एक मात्र सहारा हैं। क्योंकि यहां से दिल्ली जाने के लिए प्रतिदिन महज एक कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन जाती है। इसमें रिजर्वेशन के लिए महीनों पहले से प्रयास करने पड़ते हैं। इसके अलावा एक अन्य ट्रेन आनंद बिहार एक्सप्रेस भी चलती है लेकिन यह साप्ताहिक है। इससे इस ट्रेन का भी कोई फायदा नहीं होता है।
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